पन्ना में विस्थापन के विरोध में 51वें दिन भी चिता आंदोलन, महिलाओं का अनोखा प्रदर्शन…

पन्ना। केन-बेतवा, मझगाय, रूंझ और ललितपुर-सिंगरौली रेलमार्ग परियोजनाओं से प्रभावित किसानों, आदिवासियों और विस्थापित परिवारों का आंदोलन 1 नवंबर को 51वें दिन भी जारी रहा। जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन में प्रदर्शनकारियों ने अनोखे तरीके से विरोध जताया।
चिता, फांसी और सूली के जरिए जताया विरोध..
आंदोलन स्थल पर आदिवासी महिलाएं पानी में बनाई गई सांकेतिक चिताओं पर लेटी नजर आईं। वहीं किसानों ने फांसी के फंदे और युवाओं ने सूली पर लटककर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि परियोजनाओं के कारण उनके घर, जमीन और आजीविका पर संकट खड़ा हो रहा है।
मुआवजे और पुनर्वास को लेकर नाराजगी…आंदोलनकारियों का आरोप है कि भूमि अधिग्रहण कानून 2013 की धारा 38 के तहत डूब क्षेत्र में आने वाले परिवारों का पुनर्वास कम से कम छह महीने पहले पूरा किया जाना चाहिए। उनका कहना है कि पूरा मुआवजा दिए बिना मकान तोड़ने और गांव खाली कराने की कार्रवाई शुरू की गई।
पुलिस कार्रवाई और गिरफ्तारियों का भी विरोध…जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने लाठीचार्ज किया और आंदोलनकारियों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज किए। संगठन की आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार पिछले 35 दिनों से पन्ना जिला जेल में बंद हैं। भटनागर के मुताबिक, मझगाय बांध परियोजना से प्रभावित लोगों पर छतरपुर जिले में हत्या के प्रयास के मामले भी दर्ज किए गए हैं।
समाधान की उम्मीद, लेकिन आंदोलन जारी….अधिकारियों के तबादले और नए कलेक्टर हर्ष सिंह से बातचीत के बाद समाधान की उम्मीद जताई गई है। हालांकि, अमित भटनागर ने स्पष्ट किया कि उचित मुआवजा, पुनर्वास और दर्ज मामलों से राहत मिलने तक आंदोलन जारी रहेगा।
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