रीवा में विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति और उपाध्यक्ष अजय पटेल के बीच सुलह, सीएम की समझाइश के बाद विवाद खत्म करने पर सहमति..

रीवा। विंध्य विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति और उपाध्यक्ष अजय सिंह पटेल के बीच चल रहा विवाद अब सुलह की ओर बढ़ गया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की समझाइश के बाद दोनों नेताओं ने पुराने मतभेद भुलाकर मिलकर काम करने की बात कही है। विवाद के बीच मुख्यमंत्री ने दोनों नेताओं को भोपाल बुलाकर आपसी मतभेद दूर करने और प्राधिकरण के विकास कार्यों पर ध्यान देने की समझाइश दी थी।
मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष ने की थी बैठक…विवाद बढ़ने के बाद मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने दोनों नेताओं को भोपाल बुलाया था। इसके अलावा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने प्रदेश कार्यालय में दोनों के साथ बैठक की। इस दौरान सार्वजनिक रूप से सामने आए आरोपों और आपसी मतभेदों पर नाराजगी जताई गई।
संगठन की ओर से दोनों नेताओं को स्पष्ट संदेश दिया गया कि उन्हें विंध्य के विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई है, न कि आपसी विवाद बढ़ाने की। साथ मिलकर काम करने और प्राधिकरण की योजनाओं को आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
ट्रेन में श्रीखंड खाने के साथ रिश्तों में आई मिठास…भाजपा नेता पंचूलाल प्रजापति ने बताया कि भोपाल से लौटते समय ट्रेन में उनकी और उपाध्यक्ष अजय सिंह पटेल की सीट अगल-बगल थी। दोनों ने साथ बैठकर बातचीत की। इस दौरान अजय पटेल ने उन्हें श्रीखंड भी ऑफर किया।
पंचूलाल के मुताबिक, मुख्यमंत्री और पार्टी नेतृत्व की समझाइश के बाद अब दोनों के बीच कोई नाराजगी नहीं है। उन्होंने पुराने गिले-शिकवे भुलाकर आगे साथ काम करने की बात कही।
मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर लगाए थे गंभीर आरोप…गौरतलब है कि 29 अक्टूबर को अध्यक्ष पंचूलाल प्रजापति ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर उपाध्यक्ष अजय सिंह पटेल के खिलाफ शिकायत की थी। पत्र में उन्होंने मानसिक रूप से परेशान करने, प्रशासनिक कामकाज में हस्तक्षेप करने और अधिकारियों पर दबाव बनवाने जैसे आरोप लगाए थे।
उन्होंने रीवा कलेक्टर और कमिश्नर के कामकाज को प्रभावित करने तथा प्राधिकरण की विकास योजनाओं और बजट आवंटन में हस्तक्षेप किए जाने की आशंका भी जताई थी। इन आरोपों पर उपाध्यक्ष का पक्ष उपलब्ध जानकारी में शामिल नहीं है।
सीईओ की नियुक्ति को लेकर भी हुआ था विवाद….दोनों नेताओं के बीच मतभेद की एक प्रमुख वजह प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) की नियुक्ति को भी माना गया। तत्कालीन सीईओ को हटाकर तृतीय श्रेणी अधिकारी केडी साकेत को जिम्मेदारी दिए जाने पर उपाध्यक्षों ने आपत्ति जताई थी। बाद में शासन ने साकेत की जगह प्रथम श्रेणी अधिकारी डीके अहिरवार को सीईओ की जिम्मेदारी सौंपी थी।
जातिसूचक टिप्पणी की शिकायत भी आई थी सामने….विवाद के दौरान पंचूलाल प्रजापति ने उपाध्यक्ष पर जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए अजाक थाने में शिकायत की थी। हालांकि, अगले दिन शिकायत वापस लेने की बात भी सामने आई। दूसरी ओर अजय सिंह पटेल ने इन आरोपों को गलत बताया था।
अब दोनों नेताओं के बीच सुलह के बाद विंध्य विकास प्राधिकरण के कामकाज पर सबकी नजर रहेगी। देखना होगा कि आपसी सहमति के बाद विकास योजनाओं और प्रशासनिक कार्यों में किस तरह तेजी आती है।
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