सतना में दो प्रसूताओं की मौत के डेथ ऑडिट में सामने आईं इलाज संबंधी कमियां, एक को समय पर नहीं मिला रक्त; दूसरी की जरूरी जांचें नहीं हुईं…

सतना। जिले में जुलाई और अगस्त 2026 के दौरान दो प्रसूताओं की मौत के मामलों की डेथ ऑडिट रिपोर्ट में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी कई कमियां सामने आई हैं। रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रसूता की मौत प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव के कारण हुई, जबकि दूसरी प्रसूता की मौत गंभीर एक्लेम्पसिया और उससे जुड़ी जटिलताओं के चलते हुई। मातृ मृत्यु समीक्षा में समय पर उपचार, रक्त की उपलब्धता, जरूरी जांच और रेफरल व्यवस्था से जुड़े पहलुओं को रेखांकित किया गया है।

पहला मामला: प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव से हुई मौत…दुधा निवासी 25 वर्षीय अभिलाषा सोनी को 8 जुलाई की रात नागौद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया गया था। 9 जुलाई को सिजेरियन ऑपरेशन से प्रसव के बाद उन्हें अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। गर्भाशय में पर्याप्त संकुचन नहीं होने से उनकी स्थिति गंभीर हो गई।
नागौद सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तत्काल रक्त चढ़ाने की सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। यहां उनकी जान बचाने के लिए गर्भाशय निकालने का ऑपरेशन किया गया। उपचार के दौरान उन्हें 3 यूनिट रक्त, 4 यूनिट प्लेटलेट्स और 7 यूनिट प्लाज्मा चढ़ाया गया। वेंटिलेटर पर रखकर भी उपचार किया गया, लेकिन 10 जुलाई को सुबह 4:35 बजे उनकी मौत हो गई। जांच में उनका हीमोग्लोबिन स्तर 2.3 ग्राम प्रति डेसीलीटर दर्ज किया गया था।
दूसरा मामला: गर्भावस्था के दौरान कई जरूरी जांचें नहीं हुईं….दूसरा मामला मझगवां के दधिया गांव की 19 वर्षीय निराशा देवी लोधी का है। उन्हें गंभीर एक्लेम्पसिया और प्रसव में रुकावट के चलते 20 अगस्त को जिला अस्पताल लाया गया था। उस समय उनका ब्लड प्रेशर 180/120 था। डॉक्टरों ने आपातकालीन सिजेरियन ऑपरेशन किया, जिससे 3.085 किलोग्राम के स्वस्थ बच्चे का जन्म हुआ। हालांकि, प्रसूता की हालत लगातार बिगड़ती गई और 23 अगस्त को उनकी मौत हो गई।
डेथ ऑडिट में सामने आया कि गर्भावस्था के 12 सप्ताह के भीतर उनका पंजीयन नहीं हुआ था। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (PMSMA) के तहत भी उनकी जांच नहीं कराई गई थी। चार प्रसवपूर्व जांच होने के बावजूद यूरिन में एल्ब्यूमिन और शुगर टेस्ट तथा सोनोग्राफी नहीं कराई गई। इसके अलावा एचआईवी, हेपेटाइटिस-बी, सिफलिस और ओजीटीटी की जांच का रिकॉर्ड भी नहीं मिला।
मातृ मृत्यु समीक्षा में रेफरल व्यवस्था पर भी उठे सवाल….मातृ मृत्यु समीक्षा में दोनों मामलों में समय पर रेफरल और उच्च स्तरीय उपचार तक पहुंचने में हुई देरी को महत्वपूर्ण पहलू माना गया है। प्रसूति विभाग की एचओडी डॉ. मंजू सिंह के मुताबिक, दोनों प्रसूताओं को जिला अस्पताल पहुंचने पर निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार उपचार दिया गया था, लेकिन उस समय तक उनकी स्थिति काफी गंभीर हो चुकी थी।
उन्होंने बताया कि डेथ ऑडिट में सामने आई कमियां मुख्य रूप से परिधीय स्वास्थ्य केंद्रों के स्तर पर पाई गई हैं। इन मामलों ने गर्भवती महिलाओं की समय पर जांच, जोखिम की पहचान, आपातकालीन रक्त उपलब्धता और बेहतर रेफरल व्यवस्था की आवश्यकता को सामने रखा है।
#SatnaNews #MaternalHealth #HealthNews #MadhyaPradeshNews #RewanchalRoshni









