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उत्तर प्रदेश के आम की विदेशों में बढ़ी मांग, 12.5 टन दशहरी-लंगड़ा दुबई रवाना

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दुबई 

उत्तर प्रदेश के बागों में उगने वाले मशहूर दशहरी और लंगड़ा आम अब खाड़ी देशों के बाजार में भी अपनी पहचान बना रहे हैं. भारत ने पहली बार उत्तर प्रदेश से दुबई तक समुद्री मार्ग के जरिए 12.5 टन आम की सफल कमर्शियल खेप भेजी है. इस उपलब्धि ने भारतीय आमों को नए निर्यात अवसर मुहैया कराने के साथ-साथ किसानों के लिए भी बेहतर कमाई का रास्ता तैयार किया है। 

पहली बार समुद्री मार्ग से दुबई पहुंचा UP का आम
अब तक विदेशों में आम का निर्यात मुख्य रूप से हवाई मार्ग से किया जाता था, जिससे लागत काफी बढ़ जाती थी. इस बार अमरोहा से दशहरी और लंगड़ा आम की 12.5 टन की खेप 40 फीट के रेफ्रिजरेटेड कंटेनर में समुद्री मार्ग से दुबई भेजी गई. यह खेप दुबई के अल अवीर फ्रूट एंड वेजिटेबल मार्केट पहुंची. इस पहल को कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (APEDA) और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान (ICAR-CISH) का सहयोग मिला। 

कम लागत, किसानों को बेहतर रिटर्न
हवाई परिवहन के मुकाबले समुद्री मार्ग काफी किफायती माना जाता है. इससे निर्यात लागत कम करने में मदद मिली है. अधिकारियों के मुताबिक कम लॉजिस्टिक्स लागत का फायदा किसानों तक पहुंचा और उन्हें आम की बिक्री पर प्रति किलो करीब 15 से 20 रुपये तक अतिरिक्त कीमत मिल सकी। 

आधुनिक तकनीक से बरकरार रही क्वालिटी!
अमरोहा स्थित आधुनिक पैकहाउस में आमों की प्रोसेसिंग और पैकिंग की गई. फलों की क्वालिटी और शेल्फ लाइफ बनाए रखने के लिए ICAR-CISH द्वारा विकसित METWASH तकनीक का इस्तेमाल किया गया. लंबी समुद्री यात्रा और मौसम संबंधी चुनौतियों के बावजूद करीब 25 दिन बाद दुबई पहुंची खेप का लगभग 90 फीसदी हिस्सा बाजार योग्य स्थिति में पाया गया। 

खाड़ी देशों में बढ़ेगी भारतीय आम की पहुंच
यह खेप संयुक्त अरब अमीरात के प्रमुख रिटेल समूह लुलु ग्रुप तक पहुंचाई गई. इस सफल निर्यात से भारतीय आमों के लिए खाड़ी क्षेत्र समेत दूसरे अंतरराष्ट्रीय बाजारों में नए अवसर खुलने की उम्मीद बढ़ी है. विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री मार्ग से निर्यात की यह सफलता भविष्य में भारतीय फलों को वैश्विक बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बना सकती है. कृषि क्षेत्र के लिए यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे निर्यात लागत कम करने, किसानों को बेहतर मूल्य दिलाने और भारतीय बागवानी उत्पादों की वैश्विक पहुंच बढ़ाने में मदद मिलेगी। 

Aditya
Author: Aditya

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