रीवा में NH-30 बायपास पर अंडरपास की मांग, 8 गांवों के ग्रामीण 3 नवंबर को करेंगे प्रदर्शन….

रीवा शहर के NH-30 बायपास पर अंडरपास या सुरक्षित क्रॉसिंग नहीं होने से आसपास के आठ गांवों के लोग परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बायपास निर्माण के बाद गांव दो हिस्सों में बंट गए हैं। खेत, स्कूल और अन्य जरूरी स्थानों पर आने-जाने के लिए लोगों को लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। समस्या के समाधान की मांग को लेकर ग्रामीणों ने 3 नवंबर को प्रदर्शन करने का ऐलान किया है।
खेत और स्कूल जाने में हो रही परेशानी…30 अक्टूबर को कलेक्टर के नाम सौंपे गए आवेदन में करहिया, मेदानी, दुआरी, धौचट, जुड़मिया, केमार, तिघरा और कचूर गांवों का उल्लेख किया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, इन गांवों के कई परिवारों के खेत बायपास के दूसरी तरफ हैं। वहीं स्कूली बच्चों को भी रोजाना आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है।
स्थानीय निवासी पुष्पेंद्र सिंह और शिवम द्विवेदी ने बताया कि अंडरपास या सुरक्षित क्रॉसिंग नहीं होने के कारण किसानों और विद्यार्थियों को काफी दूर घूमकर जाना पड़ता है। ग्रामीणों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है।
कई विभागों को आवेदन देने के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई….ग्रामीणों का कहना है कि अंडरपास निर्माण की मांग को लेकर मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, रीवा संभाग आयुक्त, कलेक्टर और हुजूर एसडीएम को पहले भी आवेदन दिए जा चुके हैं। इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं हुआ है। ग्रामीणों ने बायपास निर्माण करने वाली कंपनी पर भी सुरक्षित क्रॉसिंग की व्यवस्था नहीं करने का आरोप लगाया है।
3 नवंबर को ढोल-मंजीरे के साथ होगा प्रदर्शन…मांग पूरी नहीं होने पर ग्रामीण 3 नवंबर को सुबह 11 बजे चोरहटा-दुआरी बायपास पर प्रदर्शन करेंगे। आवेदन के अनुसार, आंदोलन में ढोल, झांझ और सीमित ध्वनि विस्तारक यंत्रों का इस्तेमाल करते हुए सांकेतिक विरोध दर्ज कराया जाएगा। इसकी सूचना पुलिस अधीक्षक और हुजूर एसडीएम को भी दी गई है।
ग्रामीणों की मांग है कि NH-30 बायपास पर अंडरपास या सुरक्षित क्रॉसिंग का निर्माण कराया जाए, ताकि आठ गांवों के लोगों को रोजाना आवागमन में होने वाली परेशानी से राहत मिल सके।
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