सतना। किसी के जीवन में शिक्षा का उजाला भरना और उसे अपने पैरों पर खड़ा होते देखना किसी भी सामाजिक संस्था के लिए सबसे बड़ी उपलब्धि होती है। सतना की खुशी रावत की कहानी इसी सार्थक प्रयास और मानवीय संवेदना की मिसाल है। करीब 13 साल पहले जिस बच्ची की शिक्षा की जिम्मेदारी उपकार हम हैं सोसाइटी ने उठाई थी, आज वही खुशी अपनी मेहनत और कमाई के दम पर आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
करीब 13 वर्ष पहले खुशी रावत कक्षा छठवीं की छात्रा थीं। उस समय उपकार हम हैं सोसाइटी की मातृशक्तियों ने उनका हाथ थामते हुए शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए सहयोग शुरू किया था। संस्था की निदेशक सोनिया जॉली के मार्गदर्शन तथा सोसाइटी की मातृशक्तियों के स्नेह, अपनत्व और निरंतर सहयोग से खुशी ने अपनी पढ़ाई जारी रखी। समय के साथ उन्होंने न केवल एमकॉम तक की शिक्षा पूरी की, बल्कि अपने जीवन को नई दिशा देने के लिए लगातार मेहनत भी की।
शिक्षा पूरी करने के बाद सीए प्रशांत और सीए विपिन राजपूत के मार्गदर्शन में खुशी ने लेखा कार्य का व्यावसायिक प्रशिक्षण प्राप्त किया। अपनी योग्यता और मेहनत के बल पर आज वह एक प्रतिष्ठित कंपनी के लेखा विभाग में कार्यरत हैं और आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन चुकी हैं।
अपनी कमाई से खरीदा स्कूटी, सोसाइटी का आशीर्वाद लेने पहुंचीं खुशी…. खुशी की सफलता का एक खास पड़ाव तब सामने आया, जब उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से पूरी कीमत चुकाकर स्कूटी खरीदी। यह उनके लिए केवल एक वाहन खरीदने की उपलब्धि नहीं, बल्कि वर्षों के संघर्ष, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की पहचान है।
अपनी इस खुशी को साझा करने और आशीर्वाद लेने जब वह उपकार हम हैं सोसाइटी पहुंचीं तो वहां मौजूद मातृशक्तियां उन्हें आत्मनिर्भर देखकर भावुक हो उठीं। जिस बच्ची का हाथ कभी उन्होंने शिक्षा और बेहतर भविष्य के लिए थामा था, आज उसी को अपने पैरों पर खड़ा देखकर सभी की आंखों में खुशी और गर्व के भाव नजर आए।
एक बच्ची की सफलता नहीं, 13 वर्षों के स्नेह और विश्वास की जीत….. सोसाइटी के सदस्यों के लिए यह क्षण केवल खुशी रावत की व्यक्तिगत उपलब्धि का नहीं, बल्कि उनके वर्षों के प्रयास, सहयोग और विश्वास के सार्थक होने का भी था। संस्था ने जिस उद्देश्य से खुशी की शिक्षा की जिम्मेदारी उठाई थी, आज वह उद्देश्य साकार होता दिखाई दे रहा है। खुशी की सफलता यह संदेश देती है कि किसी जरूरतमंद बच्चे को समय पर शिक्षा, सही मार्गदर्शन और अपनत्व मिल जाए तो वह भी अपने जीवन में नई ऊंचाइयां हासिल कर सकता है।
इस अवसर पर सोनिया जॉली, संध्या गांधी, रेखा कैला, रीमा कैला, वंदना नैयर, ज्योति चौरसिया, प्रतिमा अग्रवाल, सुषमा मौर्य, रेणुबाला खत्री, ममता चमड़िया, कविता वाधवानी, रेखा डिगवानी, रचना वर्मा, मधु बेदी, सोनू चमड़िया और लक्ष्मी मोहानानी सहित सोसाइटी की अन्य सदस्य उपस्थित रहीं। सभी ने खुशी को शुभकामनाएं देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य का आशीर्वाद दिया।
खुशी रावत की यह कहानी बताती है कि सच्ची मदद वह नहीं जो किसी को कुछ समय का सहारा दे, बल्कि वह है जो उसे जीवनभर अपने पैरों पर खड़े रहने का हौसला और सामर्थ्य दे। 13 साल पहले बढ़ाया गया एक मदद का हाथ आज एक बेटी की आत्मनिर्भरता और सम्मान की मजबूत पहचान बन गया है।