चित्रकूट। बाढ़ की त्रासदी के बीच प्रभावित परिवारों तक राहत और जरूरी सहायता पहुंचाने का अभियान लगातार जारी है। दीनदयाल शोध संस्थान (डीआरआई), सद्गुरु सेवा संघ समिति समेत विभिन्न सामाजिक संस्थाएं और समाजसेवी संगठन प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों की जरूरतों का जायजा ले रहे हैं और राहत सामग्री उपलब्ध कराने में जुटे हैं।
दीनदयाल शोध संस्थान की टीमें लगातार बाढ़ प्रभावित इलाकों में जाकर परिवारों से संपर्क कर रही हैं। टीमों द्वारा यह जानकारी जुटाई जा रही है कि किस क्षेत्र में किस तरह की सहायता की सबसे अधिक आवश्यकता है, ताकि राहत कार्य जरूरत के मुताबिक किया जा सके। संस्थान की ओर से प्रभावित परिवारों को भोजन, कपड़े, सूखा राशन और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
दीनदयाल शोध संस्थान के प्रधान सचिव अभय महाजन स्वयं भी प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी समस्याओं को देख रहे हैं। वे राहत कार्यों की स्थिति का जायजा लेने के साथ ही लोगों की वास्तविक जरूरतों की जानकारी ले रहे हैं। इसके आधार पर संबंधित क्षेत्रों में आवश्यक सामग्री पहुंचाने की व्यवस्था की जा रही है।
डीआरआई की टीमें प्रशासनिक अधिकारियों के लगातार संपर्क में भी हैं। प्रभावित क्षेत्रों से मिल रही जानकारी और प्रशासन के स्तर से सामने आ रही आवश्यकताओं के आधार पर राहत कार्यों को आगे बढ़ाने का प्रयास किया जा रहा है। संस्थान का जोर तत्काल जरूरतों के साथ-साथ आने वाले दिनों में आवश्यक होने वाली सामग्री की व्यवस्था पर भी है।
इधर, सद्गुरु सेवा संघ समिति सहित अन्य सामाजिक संगठन भी अपने स्तर पर राहत अभियान चला रहे हैं। संगठन भोजन, राशन और जरूरी सामग्री लेकर प्रभावित परिवारों तक पहुंच रहे हैं। बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए दूसरे शहरों और जिलों से भी समाजसेवी तथा आमजन मदद के लिए आगे आ रहे हैं।
बाढ़ से प्रभावित परिवारों के लिए यह समय बेहद कठिन है। ऐसे में प्रशासनिक प्रयासों के साथ सामाजिक संस्थाओं, संगठनों और आमजन की सहभागिता राहत कार्यों को मजबूती दे रही है। जरूरतमंद परिवारों तक सीधे पहुंचकर उनकी आवश्यकताओं के अनुसार सहायता उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
बाइट- अभय महाजन, प्रधान सचिव, दीनदयाल शोध संस्थान, चित्रकूट….
अभय महाजन ने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने के लिए संस्थान की टीमें लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं। जरूरतमंद परिवारों का सर्वे कर उनकी वास्तविक आवश्यकताओं के अनुसार भोजन, कपड़े, सूखा राशन और अन्य जरूरी सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। प्रशासन, सामाजिक संस्थाओं और आमजन के सहयोग से राहत अभियान लगातार जारी है।