तीन बार जनता ने चुना प्रतिनिधि, किसानों और खेती से रहा गहरा जुड़ाव,
लोगों के बीच रहकर राजनीति करने वाले दादू साहब की विदाई…
नागौद। नागौद की गलियां आज खामोश हैं। चौपालों पर चर्चाएं हैं, लेकिन आवाजों में पहले जैसी रौनक नहीं। क्षेत्र के पूर्व विधायक रामप्रताप सिंह ‘दादू साहब’ का दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके स्वस्थ होकर लौटने की उम्मीद लगाए परिवार, समर्थकों और परिचितों के बीच अब शोक का माहौल है।
रामप्रताप सिंह को नागौद की जनता ने तीन बार अपना प्रतिनिधि चुना। दो बार कांग्रेस के टिकट पर और एक बार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में उन्होंने चुनाव जीता। लंबे राजनीतिक सफर के बावजूद उनकी पहचान केवल चुनावी राजनीति तक सीमित नहीं रही। वे लोगों के बीच उठने-बैठने और उनकी समस्याओं को सुनने वाले नेता के रूप में जाने जाते रहे। आम लोगों को परिवार की तरह साथ लेकर चलना उनकी कार्यशैली का हिस्सा रहा।
उनके परिवार से जुड़ी एक बात इस विदाई को और भावुक करती है। नातिन को अपनी देखरेख में डॉक्टर बनाने का सपना उन्होंने पूरा किया, लेकिन उसे डोली में बिठाने की इच्छा अधूरी रह गई।
रामप्रताप सिंह का कृषि और किसानों से विशेष जुड़ाव था। लोगों की मानें तो वे गाड़ियों और कृषि यंत्रों के शौकीन भी थे। ट्रैक्टर से लेकर खेती में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न वाहनों और उपकरणों को खुद बनाने-सुधारने में उनकी रुचि थी। बताया जाता है कि बड़ी समस्या होने पर ही उनके यहां कारीगर या मिस्त्री पहुंचता था। खेती को करीब से समझने के कारण किसानों की परेशानियों को लेकर वे अक्सर मुखर रहते थे।
बरगी से नर्मदा का जल विंध्य तक लाने का मुद्दा भी उनके प्रयासों से जुड़ा रहा। आज जब इस दिशा में उम्मीदें आगे बढ़ रही हैं, तब आने वाले समय में जब नर्मदा का जल विंध्य की धरती तक पहुंचेगा, तो संभव है कि उस पानी के साथ दादू साहब की याद भी लोगों के बीच जिंदा रहे। जिस सपने के लिए वे आवाज उठाते रहे, उसकी सुखद अनुभूति वे स्वयं नहीं कर पाएंगे।
राजनीति में पद और परिस्थितियां बदलती रहती हैं, लेकिन लोगों के बीच बिताया समय और जुड़ी हुई स्मृतियां लंबे समय तक रहती हैं। रामप्रताप सिंह का निधन नागौद की राजनीति और सामाजिक जीवन में एक खाली जगह छोड़ गया है।