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अमेरिकी दबदबे के बीच ईरान से छिना होर्मुज का नियंत्रण, जहाजों ने बदले रास्ते

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तेहरान
अमेरिका और ईरान के बीच बीते पांच महीनों से ज्यादा समय से जारी संघर्ष विफल शांति वार्ता और नाक की लड़ाई की भेंट चढ़ता आया है। दूसरी तरफ इस बात में भी कोई दोहराई नहीं है कि इस संघर्ष का सबसे ज्यादा असर दुनिया के सबसे संवेदनशील और अहम जलमार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर देखने को मिला है।

हालांकि बात यहीं खत्म नहीं होती, अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे तनाव के बीच अब इस रास्ते से जुड़े व्यापार और सुरक्षा को लेकर भी बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। ऐसे में अब सवाल होर्मुज पर ईरान की पकड़ को लेकर खड़े हो रहे हैं।

होर्मुज पर ईरान की पकड़ कैसे हम हुई?
इस बात को ऐसे समझिए कि बीते कुछ दिनों से होर्मुज पर अमेरिकी नौसेना की सख्त नाकेबंदी, समुद्री बारूदी सुरंगों के सफाए और अमेरिकी सुरक्षा के भरोसे जहाजों द्वारा 'ओमान रूट' व 'डार्क शिपिंग' जैसे वैकल्पिक रास्तों के इस्तेमाल से ईरान का दबदबा इस जलमार्ग पर तेजी से घट रहा है।

इतना ही नहीं ईरान की टोल टैक्स वसूलने की जिद और हमलों के बावजूद, अंतरराष्ट्रीय व्यापार अब उसकी पकड़ से बाहर होता दिख रहा है, जो वैश्विक ऊर्जा बाजार के लिए एक बड़ा बदलाव है।

ट्रंप के दांवों के मायने समझिए
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि इस जलमार्ग से सभी समुद्री बारूदी सुरंगे हटा दी गई हैं या उन्हें नष्ट कर दिया गया है।ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ फिलहाल कोई बातचीत नहीं हो रही है और अमेरिकी नौसेना की नाकेबंदी अभी भी पूरी सख्ती से जारी है।

ओमान वाले नए रास्ते का इस्तेमाल
गौर करने वाली बात यह है कि पारंपरिक रूप से इस रास्ते पर ईरान का दबदबा माना जाता था, लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। मैरीटाइम डेटा के मुताबिक, पिछले दो हफ्तों में इस रास्ते से गुजरने वाले अधिकांश जहाजों ने 'ओमान रूट' का इस्तेमाल किया है। यह संयुक्त राष्ट्र द्वारा अधिकृत एक शिपिंग चैनल है, जिसका ईरान कड़ा विरोध करता है।

ईरान की धमकियों और हमलों के जोखिम के बावजूद, जहाज अमेरिकी सुरक्षा के भरोसे इस रास्ते से गुजर रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब इस जलमार्ग पर अपनी पकड़ आंशिक रूप से खो चुका है।

टोल टैक्स से ईरान को कैसे लगा झटका?
इस बात को ऐसे समझिए कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ समझौता खत्म होने के बाद ईरान की मंशा जहाजों से भारी टोल टैक्स वसूलने की थी। लेकिन ओमान रूट के इस्तेमाल से जहाजों को ईरान के नियंत्रण वाले क्षेत्र से नहीं गुजरना पड़ रहा है, जिससे ईरान को किसी भी तरह का ट्रांजिट फीस या टैक्स नहीं मिल पा रहा है। खाड़ी देशों के लोग भी ईरान को टैक्स देना पसंद नहीं कर रहे हैं।

'डार्क शिपिंग' और तेल का व्यापार
सऊदी अरब, कुवैत और यूएई जैसे खाड़ी देशों ने अपने बड़े तेल टैंकरों को इस रास्ते से भेजना शुरू कर दिया है। ईरान के हमलों से बचने के लिए ये जहाज कई हफ्तों तक अपने ट्रांसपॉंडर (लोकेशन बताने वाला यंत्र) बंद रखकर सफर कर रहे हैं, जिसे 'डार्क शिपिंग' कहा जाता है।

अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट के अनुसार, वर्तमान में इस रास्ते से तेल का परिवहन युद्ध से पहले के औसत (करीब 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन) के काफी करीब यानी लगभग 1.5 करोड़ बैरल प्रतिदिन तक पहुंच गया है।

अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने छोड़ दी ईरान की परवाह
साफ शब्दों में कहा जाए तो अमेरिकी नौसेना की मौजूदगी और सुरक्षा के भरोसे अंतरराष्ट्रीय जहाजों ने ईरान के नियमों और टोल टैक्स की परवाह करना छोड़ दिया है। ऐसे में वैकल्पिक रास्तों (ओमान रूट) और छिपे हुए यातायात (डार्क शिपिंग) के बढ़ने से वैश्विक ऊर्जा का यह सबसे बड़ा रास्ता अब ईरान के हाथों से फिसलता हुआ नजर आ रहा है।

 

Aditya
Author: Aditya

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