रीवा में स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सांसद जनार्दन मिश्रा ने उठाए सवाल, डॉक्टरों के लाइसेंस निरस्त करने की कही बात..

रीवा में स्वास्थ्य सेवाओं और इलाज में लापरवाही की शिकायतों को लेकर भाजपा सांसद जनार्दन मिश्रा ने नाराजगी जताई है। उन्होंने डॉक्टरों की कार्यप्रणाली, निजी प्रैक्टिस और सरकारी अस्पतालों में मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं पर सवाल उठाए। सांसद ने कहा कि कुछ डॉक्टरों का उद्देश्य मरीजों का इलाज करने के बजाय पैसा कमाना रह गया है। उन्होंने ऐसे डॉक्टरों के मेडिकल लाइसेंस निरस्त करने और चिकित्सा करने का अधिकार समाप्त करने की मांग की।
डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर जताई नाराजगी…सांसद जनार्दन मिश्रा ने अपने बयान में कहा कि यदि उनके पास अधिकार होता तो वे सभी डॉक्टरों के मेडिकल लाइसेंस निरस्त करवा देते। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ डॉक्टर चिकित्सा सेवा के बजाय कमाई को प्राथमिकता दे रहे हैं। उन्होंने डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जनता का भरोसा प्रभावित हो रहा है।

निजी प्रैक्टिस के साथ सरकारी अस्पतालों की जिम्मेदारी निभाने की बात….सांसद ने कहा कि डॉक्टर निजी प्रैक्टिस कर सकते हैं, लेकिन सरकारी अस्पतालों में अपनी जिम्मेदारियों का भी ठीक से निर्वहन करना चाहिए। उन्होंने मरीजों को बेहतर इलाज और स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। साथ ही लापरवाही के मामलों में संबंधित डॉक्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।
उन्होंने स्पष्ट किया कि डॉक्टरों के संबंध में यह उनकी व्यक्तिगत राय है और राज्य सरकार को इस दिशा में आवश्यक कदम उठाने चाहिए।
इलाज से जुड़ी शिकायतों के बीच आया बयान…रीवा में पिछले कुछ समय के दौरान सरकारी और निजी अस्पतालों में इलाज से संबंधित कई शिकायतें सामने आई हैं। इनमें मरीजों की मौत, उपचार में कथित लापरवाही और दवाओं से जुड़े आरोप शामिल हैं।
इन मामलों में परिजनों ने जांच और कार्रवाई की मांग की है। कुछ मामलों में अस्पताल प्रबंधन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कार्रवाई भी की गई है।
इन मामलों को लेकर उठे थे सवाल….
गांधी मेमोरियल अस्पताल मामला: अगस्त 2026 में प्रसव के दौरान मनगवां निवासी कल्पना मिश्रा और उनके नवजात की मौत हुई थी। परिजनों ने इलाज में लापरवाही के आरोप लगाए थे। इसके बाद दो डॉक्टर और दो नर्सिंग अधिकारियों को निलंबित किया गया था। डीन और अधीक्षक को भी पद से हटाया गया था।
गर्भवती महिला की मौत: अक्टूबर 2025 में सतना से रेफर होकर आई दीपा गुप्ता और उनके गर्भस्थ शिशु की संजय गांधी अस्पताल में मौत हो गई थी। परिजनों ने उचित उपचार नहीं मिलने का आरोप लगाया था।
महिला के ऑपरेशन से जुड़ी शिकायत: सितंबर 2026 में मिथिलेश सिंह ने एक डॉक्टर पर कंधे का गलत ऑपरेशन करने का आरोप लगाया था। महिला ने इस संबंध में कलेक्टर से शिकायत की थी। बाद में आग लगने की घटना में उनकी मौत हो गई।
युवक की मौत का मामला: अक्टूबर 2026 में 21 वर्षीय अक्षत शुक्ला की इलाज के दौरान मौत हो गई थी। उनके पिता ने आरोप लगाया था कि अस्पताल में 20 मिनट के भीतर टीबी की 14 गोलियां दी गईं, जिसके बाद बेटे की हालत बिगड़ गई। इस मामले में पुलिस से शिकायत कर जांच की मांग की गई थी।
रीवा में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर सांसद के इस बयान के बाद अस्पतालों में उपचार की गुणवत्ता, डॉक्टरों की जवाबदेही और मरीजों को मिलने वाली सुविधाओं का मुद्दा फिर चर्चा में है।
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