गांधी जयंती पर रीवा जेल से 7 उम्रकैदी रिहा: 14 साल काटी वास्तविक सजा, परिहार अवधि जोड़कर 20 साल बाद मिली आजादी…

रीवा। गांधी जयंती के अवसर पर 2 अक्टूबर को विशेष परिहार के तहत केंद्रीय जेल रीवा से आजीवन कारावास की सजा काट रहे 7 बंदियों को रिहा किया गया। मध्यप्रदेश शासन के जेल विभाग के आदेश के अनुसार, इन बंदियों ने 14 साल की वास्तविक सजा पूरी कर ली थी। परिहार अवधि जोड़ने के बाद 20 साल की सजा पूरी होने पर उन्हें रिहाई दी गई।
रिहा किए गए बंदियों में अनूपपुर के 2, शहडोल के 2 और सिंगरौली के 3 बंदी शामिल हैं। सभी भारतीय दंड विधान की धारा 302 के तहत दोषसिद्ध थे और आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे।
शहडोल के दो बंदियों को मिली रिहाई
विशेष परिहार के तहत शहडोल जिले के अमृतलाल बैगा (41) और श्रीराम बैगा उर्फ बोक्या (54) को रिहा किया गया। दोनों ने निर्धारित सजा अवधि पूरी कर ली थी।
अनूपपुर के दो बंदी भी रिहा
अनूपपुर जिले के बच्चेलाल बसोर (58) और शंकरदयाल चौकसे (56) को भी विशेष परिहार का लाभ मिला। शासन द्वारा निर्धारित सजा अवधि पूरी होने के बाद दोनों को जेल से रिहा किया गया।
सिंगरौली के तीन बंदियों की रिहाई
सिंगरौली जिले से शिवप्रसाद साकेत (49), राजेंद्र उर्फ लल्लू केवट (37) और गुलाब सिंह गोंड़ (38) को रिहा किया गया। तीनों आजीवन कारावास की सजा काट रहे थे और विशेष परिहार के तहत निर्धारित अवधि पूरी कर चुके थे।
रिहा किए गए 7 बंदी
- अनूपपुर: बच्चेलाल बसोर (58), शंकरदयाल चौकसे (56)
- शहडोल: अमृतलाल बैगा (41), श्रीराम बैगा उर्फ बोक्या (54)
- सिंगरौली: शिवप्रसाद साकेत (49), राजेंद्र उर्फ लल्लू केवट (37), गुलाब सिंह गोंड़ (38)
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