Edition

सतना में 10 बेड के पीआईसीयू में 32 बच्चे भर्ती:30 ऑक्सीजन पर; शिशु वार्ड में भी क्षमता से ज्यादा मरीज, जमीन पर हो रहा है इलाज….

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

सतना में मौसम बदलते ही बच्चों पर बढ़ा संक्रमण का असर: PICU में 32 और शिशु वार्ड में 47 बच्चे भर्ती, 30 ऑक्सीजन सपोर्ट पर…

सतना। जिले में लगातार बदल रहे मौसम का असर अब बच्चों की सेहत पर दिखाई देने लगा है। वायरल फीवर, ब्रोंकोलाइटिस और निमोनिया जैसे संक्रमण के मरीज बढ़ने से सरदार वल्लभभाई पटेल शासकीय जिला अस्पताल का पीआईसीयू और शिशु वार्ड क्षमता से अधिक मरीजों से भर गया है। अस्पताल में बच्चों की संख्या बढ़ने के कारण सीमित संसाधनों के बीच इलाज की व्यवस्था की जा रही है।

अस्पताल के 10 बेड वाले PICU में फिलहाल 32 बच्चे भर्ती हैं, जिनमें से 30 बच्चों को ऑक्सीजन सपोर्ट दिया जा रहा है। वहीं 20 बेड की क्षमता वाले शिशु वार्ड में 47 बच्चे भर्ती हैं। दोनों यूनिट को मिलाकर कुल 79 बच्चों का उपचार चल रहा है।

12 बच्चों में निमोनिया के लक्षण

अस्पताल में भर्ती बच्चों में से करीब 12 बच्चों में निमोनिया के लक्षण पाए गए हैं। फेफड़ों में संक्रमण के कारण इन बच्चों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। डॉक्टर बच्चों की स्थिति के अनुसार नेबुलाइजेशन, ऑक्सीजन और आवश्यक दवाओं के जरिए उपचार कर रहे हैं।

चिकित्सकों के अनुसार फिलहाल वायरल निमोनिया के गंभीर मामले ज्यादा सामने नहीं आए हैं, लेकिन मौसम में तापमान गिरने के साथ बच्चों में सांस संबंधी संक्रमण के मामले बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में छोटे बच्चों को लेकर अभिभावकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।

20 बेड के वार्ड में 47 बच्चे, कई जगह एक बेड पर दो मरीज

शिशु वार्ड की निर्धारित क्षमता महज 20 बेड है, लेकिन वर्तमान में यहां 47 बच्चे भर्ती हैं। मरीजों की संख्या क्षमता से दोगुने से भी ज्यादा होने के कारण अस्पताल प्रबंधन को अतिरिक्त व्यवस्था करनी पड़ रही है।

जगह की कमी के चलते कई स्थानों पर एक बेड पर दो बच्चों को रखने की स्थिति बनी हुई है। वहीं अतिरिक्त जगह नहीं मिलने पर कुछ बच्चों के लिए जमीन पर गद्दे बिछाकर उपचार की व्यवस्था की गई है। गद्दे कम पड़ने पर बेडशीट बिछाकर बच्चों को लिटाने की व्यवस्था की गई है।

मौसम में बदलाव के साथ बढ़ सकता है संक्रमण

डॉक्टरों का कहना है कि मौसम में उतार-चढ़ाव और तापमान में गिरावट के दौरान बच्चों में वायरल और सांस से जुड़े संक्रमण तेजी से बढ़ सकते हैं। खासकर छोटे बच्चों में सर्दी, खांसी और बुखार के साथ सांस लेने में परेशानी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

अभिभावकों को सलाह दी गई है कि बच्चों को ठंड से बचाकर रखें और बुखार, लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी, तेज सांस चलना या सुस्ती जैसे लक्षण दिखाई देने पर समय पर चिकित्सकीय सलाह लें। गंभीर लक्षण होने पर बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाना जरूरी है।

#Satna #SatnaNews #DistrictHospital #PICU #ChildHealth #MadhyaPradesh #ViralFever #Pneumonia #Bronchiolitis #RewanchalRoshni

Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

journalist

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!