सतना। लोगों की चर्चाओं और उठ रहे सवालों पर गौर करें तो सतना के विकास की नस्ती में एक और पन्ना जुड़ता दिखाई दे रहा है। आसपास के जिलों में नई परियोजनाओं और सुविधाओं की खबरें आती हैं, जबकि सतना के हिस्से में फिर इंतजार, आश्वासन और सफाई आती नजर आती है। अब सवाल यह है कि सतना पीछे है या सतना के नेता आगे आने की कोशिश में पीछे रह गए?

मुख्यमंत्री सुगम परिवहन बस सेवा के मौजूदा चरण में सतना का नाम नहीं होने पर सवाल उठना स्वाभाविक है। कटनी और भिंड जैसे जिलों को जगह मिली, लेकिन सतना को फिर अगले फेज का लॉलीपॉप! जनता पूछ रही है, साहब, सतना की बारी आखिर कब आएगी…

स्मार्ट सिटी की कहानी भी कम दिलचस्प नहीं। करोड़ों की योजनाएं, उद्घाटन की पट्टिकाएं और विकास के दावे अपनी जगह हैं, लेकिन सड़क पर निकलते ही गड्ढे, जाम, सीवर और जलभराव जनता को जमीन का विकास समझा देते हैं। ऐसा लगता है जैसे स्मार्ट सिटी का सबसे स्मार्ट हिस्सा सिर्फ उसका नाम बचा है।

हवाई अड्डा है, लेकिन हवाई सेवा का इंतजार। सड़कें हैं, मगर जाम से राहत नहीं। योजनाएं हैं, मगर सुविधा की तलाश जारी।
रीवा आगे बढ़ता दिखे और सतना हर बार अगले चरण में खड़ा मिले तो सवाल नेताओं से ही पूछा जाएगा।
लोग सवाल कर रहे आखिर सतना के जनप्रतिनिधि जनता के लिए योजनाएं लाने की राजनीति कर रहे हैं या योजनाओं के छूट जाने के बाद सफाई देने की?
क्योंकि अब जनता कह रही है, भाषण बहुत हो गए साहब, सतना को तारीख नहीं, तरक्की चाहिए।
सोशल मीडिया पर विकास, जमीन पर सतना बेहाल!… लोगों और व्यापारियों का कहना है कि सतना के जिम्मेदार जनप्रतिनिधि और विपक्ष शहर के मुद्दों से ज्यादा अपनी राजनीति, पारिवारिक हितों और सोशल मीडिया की तस्वीरों में व्यस्त दिखाई देते हैं। हर दूसरे दिन पोस्ट… आज इस सड़क का उद्घाटन, आज इस नाली का भूमिपूजन, आज इस निर्माण की सौगात, लेकिन निर्माण टिकता कितना है, यह जनता जानती है।










