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चित्रकूट बाढ़: खुद प्रभावित होने के बावजूद राहत अभियान में जुटा दीनदयाल शोध संस्थान…..

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चित्रकूट में बाढ़ का पानी भले ही धीरे-धीरे उतरने लगा हो, लेकिन प्रभावित इलाकों में मुश्किलें अभी कम नहीं हुई हैं। ऐसे समय में दीनदयाल शोध संस्थान (DRI) की टीमें लगातार फील्ड में उतरकर बाढ़ पीड़ितों तक राहत पहुंचाने में जुटी हैं।

संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन स्वयं प्रभावित बस्तियों में पहुंचकर लोगों की समस्याएं जान रहे हैं और राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं।

खास बात यह है कि बाढ़ की चपेट में दीनदयाल शोध संस्थान भी आया। संस्थान की पूरी बिल्डिंग में पानी भर गया था और कई स्थानों पर पानी छत तक पहुंच गया, जिससे संस्थान को भी भारी नुकसान हुआ। इसके बावजूद संस्थान की टीम ने पहले जरूरी व्यवस्थाओं को संभाला और फिर प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाने के अभियान को प्राथमिकता दी।

दीनदयाल शोध संस्थान के संगठन सचिव अभय महाजन ने कहा……. 29 अगस्त को मां मंदाकिनी के रौद्र रूप से चित्रकूट की निचली बस्तियों के कई परिवार प्रभावित हुए। मीडिया के माध्यम से जानकारी मिलने पर देशभर से संस्थान और नानाजी देशमुख के प्रति श्रद्धा रखने वाले लोगों ने सहायता भेजी। चटाई, साड़ियां, ब्लाउज, गमछे, जूते-चप्पल, अंतर्वस्त्र और कंबल जैसी जरूरी सामग्री पहुंची है। उन्होंने कहा कि यह जनसहयोग और सामाजिक सहभागिता का उदाहरण है। सरकारी तंत्र भी लगातार राहत कार्य में जुटा है। संस्थान की मेडिकल टीम स्वास्थ्य सेवाएं दे रही है और सर्वे कर उन परिवारों तक मदद पहुंचा रही है, जहां अभी सहायता नहीं पहुंच सकी।

 

संगठन सचिव अभय महाजन, सह संगठन सचिव अनिल अग्रवाल समेत पूरे टीम लगातार बस्तियों और प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों से सीधे संवाद कर रहे हैं। दर्जनों बस्तियों सहित आसपास के इलाकों में जाकर वे परिवारों की जरूरतों की जानकारी ले रहे हैं, ताकि राहत सामग्री वास्तविक जरूरतमंदों तक व्यवस्थित तरीके से पहुंचाई जा सके।

दीनदयाल शोध संस्थान की ओर से बाढ़ प्रभावित परिवारों के लिए खाद्य सामग्री, राशन और आवश्यक राहत सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। जरूरत को देखते हुए चटाई, साड़ियां और कपड़े भी मंगाए गए हैं, ताकि घर और सामान गंवा चुके परिवारों को तत्काल राहत मिल सके। इसके साथ ही स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को देखते हुए मेडिकल कैंप लगाकर लोगों की जांच और उपचार की व्यवस्था भी की जा रही है।

बाढ़ के बाद अब चुनौती प्रभावित परिवारों को दोबारा व्यवस्थित करने की है। इसी दिशा में दीनदयाल शोध संस्थान की टीमें लगातार क्षेत्र में रहकर जरूरतों का आकलन कर रही हैं। पानी उतर रहा है, लेकिन राहत का काम अभी बाकी है, और यही काम फिलहाल फील्ड में दिखाई दे रहा है…..

अपील… अगर आपके क्षेत्र में कोई सरकारी कर्मचारी, आम नागरिक, जनप्रतिनिधि, समाजसेवी या संस्था बाढ़ पीड़ितों के लिए आर्थिक, शारीरिक, मानसिक अथवा किसी भी रूप में सहयोग कर रही है, तो हमें जरूर बताएं। हम उनके सेवा कार्यों की खबरें अपने न्यूज़ ग्रुप में प्रमुखता से प्रकाशित करेंगे, ताकि अच्छे कार्यों की पहचान हो और दूसरों को भी मदद के लिए प्रेरणा मिले।

Amit Kumar Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

Mob. 9669103653

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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