रीवा के बहुचर्चित छात्रावास घोटाला मामले में मऊगंज में पदस्थ अपर कलेक्टर (एडीएम) पी.के. पांडे की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। मामले की जांच में उनकी भूमिका पर सवाल उठने के बाद रीवा कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने उनके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई के लिए कमिश्नर को प्रस्ताव भेजा है। इससे लंबे समय से लंबित इस मामले में एक बार फिर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है।

यह मामला आदिम जाति कल्याण विभाग के छात्रावासों में मरम्मत कार्य और सामग्री खरीदी में कथित वित्तीय अनियमितताओं से जुड़ा है। शिकायतकर्ता कमल सिंह बघेल ने आरोप लगाया था कि कई छात्रावासों में मरम्मत कार्य कराए बिना ही लाखों रुपये का भुगतान कर दिया गया। इसके अलावा बिजली फिटिंग, पंखों और अन्य सामग्री की खरीद में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए थे।

जांच के दौरान कई बिंदुओं पर गड़बड़ियां सामने आने के बाद संबंधित दस्तावेजों की जांच की गई। इसी मामले में विभाग के बाबू विकास तिवारी को पहले ही निलंबित किया जा चुका है। बताया गया कि जिन दिनों कथित अनियमितताएं हुईं, उस समय पी.के. पांडे आदिम जाति कल्याण विभाग में जिला संयोजक का प्रभार संभाल रहे थे।
जांच के दौरान पी.के. पांडे को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था, लेकिन अधिकारियों के अनुसार उनका जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया। इसके बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने पूरे मामले का परीक्षण कर कमिश्नर को उनके खिलाफ कार्रवाई का प्रस्ताव भेज दिया है। अब प्रशासनिक स्तर पर आगे की कार्रवाई पर सभी की नजर बनी हुई है।









