अमृत परियोजना में 30 करोड़ का काम समयवृद्धि के बाद भी अधूरा, जियो मिलर को ब्लैकलिस्ट करने शासन को भेजा प्रस्ताव; पेयजल व्यवस्था में सुधार नहीं होने पर कृष्णा कन्स्ट्रक्शन का अनुबंध भी समाप्त
नगर निगम कमिश्नर डॉ. नागार्जुन बी. गौड़ा ने नागरिक सुविधाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में लापरवाही पर सख्त कार्रवाई करते हुए दो फर्मों के अनुबंध समाप्त कर दिए हैं। अमृत परियोजना के कार्य निर्धारित समय-सीमा के बाद भी पूरे नहीं होने पर जियो मिलर एंड कंपनी प्रा.लि. का अनुबंध समाप्त किया गया है। साथ ही फर्म को ब्लैकलिस्ट करने के लिए शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। वहीं, पेयजल व्यवस्था के संचालन एवं संधारण में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर मेसर्स कृष्णा कन्स्ट्रक्शन कंपनी का अनुबंध भी समाप्त कर दिया गया।
अमृत परियोजना के तहत शहर में पाइपलाइन विस्तार और चार उच्चस्तरीय टंकियों के निर्माण का करीब 30 करोड़ रुपये का कार्य जियो मिलर एंड कंपनी को सौंपा गया था। कार्य पूरा करने की मूल समय-सीमा 21 दिसंबर 2023 थी, जिसे फर्म के अनुरोध पर तीन माह बढ़ाकर 31 मार्च 2024 किया गया। इसके बावजूद करीब 18 माह बाद भी कार्य अधूरा रहा। समीक्षा में टंकियों का निर्माण अधूरा, पाइपलाइन के बाद सड़कों का समुचित रेस्टोरेशन नहीं होना, पाइपलाइन टेस्टिंग लंबित रहना, मोटर-पंप स्थापित नहीं होना और GLSR WTP का कार्य अधूरा पाया गया। इसके बाद 1 अक्टूबर 2026 को अनुबंध समाप्त कर दिया गया।
इसी तरह 18 MLD और 40 MLD वाटर ट्रीटमेंट प्लांट के संचालन एवं संधारण का कार्य कर रही कृष्णा कन्स्ट्रक्शन को पेयजल गुणवत्ता संबंधी शिकायतों के बाद कई बार सुधार के निर्देश दिए गए। पर्याप्त अवसर और अंतिम निर्देश के बावजूद अपेक्षित सुधार नहीं होने पर 1 अक्टूबर को अनुबंध समाप्त कर दिया गया।
कमिश्नर ने स्पष्ट किया कि नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं से जुड़े कार्यों में गुणवत्ता और समय-सीमा से कोई समझौता नहीं होगा। अधूरे अमृत परियोजना कार्यों का पुनः आकलन कर रिस्क एंड कॉस्ट के आधार पर नई निविदा की प्रक्रिया शुरू की जाएगी, ताकि शेष कार्य जल्द पूरे कर शहरवासियों को परियोजना का लाभ मिल सके।