सतना। जिले में मानसून का आधा सफर पूरा हो चुका है, लेकिन अच्छी बारिश का इंतजार अभी भी जारी है। आषाढ़ माह समाप्त होने के बावजूद जिले में सामान्य से कम वर्षा होने से खेती, जलाशयों और भूजल स्तर पर असर साफ दिखाई देने लगा है। अब किसानों से लेकर आम लोगों तक सभी की उम्मीदें सावन और खासकर अगस्त महीने की बारिश पर टिकी हैं।
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार मानसून के चार महीनों में से दो महीने गुजर चुके हैं। सितंबर के दूसरे पखवाड़े से मानसून की वापसी शुरू हो जाती है। ऐसे में अगस्त के करीब 30 दिन ही ऐसे हैं, जो जिले में बारिश की कमी की भरपाई कर सकते हैं। यदि इस दौरान भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो खरीफ फसलों के साथ-साथ रबी सीजन की तैयारियां भी प्रभावित हो सकती हैं।

जून में 45 प्रतिशत कम हुई बारिश
इस वर्ष जून महीने में सामान्य से काफी कम बारिश दर्ज की गई। सामान्यतः जून में करीब 5.25 इंच वर्षा होती है, जबकि इस बार केवल लगभग 1.75 इंच बारिश हुई। इसके चलते जून में करीब 45 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई।
जुलाई भी उम्मीदों पर खरी नहीं उतरी
जुलाई महीने में भी जिले में रुक-रुककर हल्की बारिश और बूंदाबांदी होती रही, लेकिन झमाझम बारिश नहीं हुई। सामान्य रूप से जुलाई में करीब 14.5 इंच बारिश होनी चाहिए थी, जबकि अब तक लगभग 12.5 इंच वर्षा ही दर्ज की गई है। इससे खेतों में नमी तो बनी रही, लेकिन जलाशयों और भूजल स्तर को अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया।
उमस से लोग बेहाल
गुरुवार को दिनभर बादलों की आवाजाही बनी रही और कई क्षेत्रों में हल्की बारिश हुई, लेकिन तेज बारिश नहीं होने से उमस भरी गर्मी ने लोगों को परेशान किया। वातावरण में अधिक नमी के कारण दिन और रात दोनों समय चिपचिपी गर्मी महसूस की गई।
मौसम विभाग के अनुसार गुरुवार को जिले का अधिकतम तापमान 31.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। सुबह 86 प्रतिशत और शाम 78 प्रतिशत आर्द्रता रिकॉर्ड की गई, जिससे उमस का असर और बढ़ गया।
किसानों की बढ़ी चिंता
लगातार कम बारिश से किसानों की चिंता बढ़ गई है। खेतों में बोई गई खरीफ फसलों को बेहतर बढ़वार के लिए पर्याप्त पानी की जरूरत है। वहीं जलाशयों में पानी कम होने से सिंचाई और पेयजल व्यवस्था पर भी असर पड़ने की आशंका है। ग्रामीण क्षेत्रों के कई छोटे तालाब और जल स्रोत अब तक पूरी तरह नहीं भर पाए हैं।
अगस्त से ही उम्मीद
मौसम विभाग का मानना है कि अगस्त में यदि अच्छी और लगातार बारिश होती है तो अब तक हुई वर्षा की कमी की काफी हद तक भरपाई हो सकती है। इससे खरीफ फसलों को संजीवनी मिलेगी, जलाशयों का जलस्तर बढ़ेगा और भूजल स्तर में भी सुधार होगा। फिलहाल सतना जिले में हर किसी की निगाहें अगस्त की बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि आने वाले 30 दिन ही इस मानसून का भविष्य तय करेंगे।









