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25 जुलाई को लौटेंगे भगवान जगन्नाथ, घुरती रथयात्रा में उमड़े श्रद्धालु

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 रांची
रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर में आयोजित रथयात्रा महोत्सव का समापन 25 जुलाई 2026 को घुरती रथयात्रा के साथ होगा. नौ दिनों के प्रवास के बाद भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा मुख्य मंदिर लौटेंगे.

परंपरा और आस्था का महापर्व
राजधानी रांची में 16 जुलाई 2026 से प्रारंभ हुआ जगन्नाथ रथयात्रा महोत्सव 25 जुलाई को घुरती रथयात्रा (बहुड़ा यात्रा) के साथ संपन्न होगा. यह पर्व भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा के मौसीबाड़ी प्रवास के समापन का प्रतीक माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, नौ दिनों तक मौसीबाड़ी में रहने के बाद तीनों देवताओं की पुनः मुख्य मंदिर में वापसी कराई जाती है.

क्या है घुरती रथ का महत्व?
घुरती रथ, जिसे बहुड़ा रथयात्रा भी कहा जाता है, रथयात्रा उत्सव का अंतिम और अत्यंत महत्वपूर्ण चरण है. इस दिन श्रद्धालु भगवान के पुनः मंदिर प्रवेश के साक्षी बनते हैं. मंदिर परिसर में विशेष पूजा-अर्चना, वैदिक मंत्रोच्चार और धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जाता है. यह परंपरा भगवान और भक्तों के पुनर्मिलन का प्रतीक मानी जाती है.

मेले की अंतिम रौनक
रथ मेले के अंतिम दिनों में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचे. बच्चों ने झूले, मनोरंजन कार्यक्रमों और झूलों का आनंद लिया, जबकि लोगों ने विभिन्न दुकानों से खरीदारी की. घुरती रथयात्रा के बाद मेले की गतिविधियां धीरे-धीरे समाप्त होने लगेंगी और मंदिर परिसर में सामान्य धार्मिक व्यवस्था बहाल हो जाएगी.

चातुर्मास की शुरुआत और विशेष मान्यता
25 जुलाई को देवशयनी एकादशी के साथ चातुर्मास का भी आरंभ होगा. धार्मिक मान्यता है कि इस अवधि में भगवान विष्णु क्षीरसागर में योगनिद्रा में चले जाते हैं. इसी कारण भगवान जगन्नाथ के दर्शन भी सीमित हो जाते हैं और केवल नियमित पूजा-अर्चना जारी रहती है. देवोत्थान एकादशी पर भगवान के जागरण के साथ पुनः विशेष दर्शन और धार्मिक अनुष्ठान प्रारंभ होते हैं.

धार्मिक विशेषज्ञों की राय
पंडित पुरनेंदु पाठक के अनुसार घुरती रथयात्रा केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामुदायिक सहभागिता और आस्था की निरंतरता का प्रतीक है. यह पर्व श्रद्धालुओं को भक्ति, सेवा और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण अवसर प्रदान करता है.

Aditya
Author: Aditya

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