शासन ने शिक्षकों को स्कूल लौटाने के दिए निर्देश, लेकिन जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के अलग-अलग प्रकोष्ठों में अब भी कई शिक्षक तैनात; आदेश और व्यवस्था के बीच बढ़ता विरोधाभास…..
सतना। प्रदेश सरकार ने सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की कमी को दूर करने और विद्यार्थियों की पढ़ाई को बेहतर बनाने के उद्देश्य से आवश्यक सेवाओं को छोड़कर शिक्षकों के अटैचमेंट समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं। शासन की मंशा थी कि कार्यालयों और अन्य संस्थानों में कार्यरत शिक्षक अपने मूल विद्यालयों में लौटकर शिक्षण कार्य संभालें। लेकिन सतना जिले में इस आदेश की जमीनी हकीकत कुछ और ही कहानी बयां कर रही है। जिला शिक्षा अधिकारी (DEO) कार्यालय के विभिन्न प्रकोष्ठों में आज भी कई शिक्षक कार्यालयी जिम्मेदारियां निभाते दिखाई दे रहे हैं।
विभागीय सूत्रों के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय के आईटी सेल, रमसा, विधि प्रकोष्ठ, उर्दू प्रकोष्ठ सहित अन्य शाखाओं में आधा दर्जन से अधिक शिक्षक लंबे समय से कार्यरत हैं। इनमें लक्ष्मीकांत पटेल (भटनवारा) आईटी सेल, शाहिद रजा (माधवगढ़) उर्दू प्रकोष्ठ, आनंद मिश्रा (वेंकट वन) और सुशील श्रीवास्तव रमसा, उमेश शुक्ला (मैहर ताला) विधि प्रकोष्ठ, राकेश श्रीवास (भैसवार) तथा रियाज खान (बाबूपुर, उचेहरा) के नाम प्रमुख रूप से सामने आ रहे हैं।
सबसे अहम सवाल यह है कि जब शासन ने सामान्य अटैचमेंट समाप्त करने का निर्णय ले लिया है, तब ये शिक्षक आखिर किस आदेश के आधार पर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में कार्यरत हैं। यदि इनकी सेवाएं किसी विशेष प्रशासनिक आवश्यकता के तहत ली जा रही हैं, तो उसके लिए सक्षम प्राधिकारी का आदेश क्या है और वह सार्वजनिक क्यों नहीं किया गया? वहीं यदि ऐसा कोई आदेश मौजूद नहीं है, तो फिर शासन के निर्देशों का पालन कौन सुनिश्चित करेगा।
यह मामला केवल कुछ शिक्षकों की तैनाती तक सीमित नहीं है। जिले के अनेक सरकारी विद्यालय पहले से ही शिक्षकों की कमी का सामना कर रहे हैं। ऐसे में यदि विद्यालयों के शिक्षक कार्यालयों में कार्यरत रहेंगे तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों की पढ़ाई पर पड़ेगा। यही वजह है कि सरकार ने अटैचमेंट समाप्त करने का फैसला लिया था, ताकि प्रत्येक शिक्षक कक्षा तक पहुंचे और शिक्षण व्यवस्था मजबूत हो सके।
शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का कहना है कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रशासनिक और लिपिकीय कार्यों के लिए अलग से स्वीकृत पद हैं। यदि उन कार्यों के लिए लगातार शिक्षकों की सेवाएं ली जाती रहेंगी तो विद्यालयों में उनकी पदस्थापना का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। यह स्थिति शासन की उस नीति के भी विपरीत मानी जा रही है, जिसमें हर शिक्षक को विद्यालय में पढ़ाने पर जोर दिया गया है।
अब निगाह जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय पर है। क्या इन सभी शिक्षकों की तैनाती सक्षम प्राधिकारी के विधिवत आदेशों के तहत की गई है? यदि हां, तो उन आदेशों को सार्वजनिक किया जाएगा या नहीं? और यदि नहीं, तो संबंधित शिक्षकों को उनके मूल विद्यालयों में कब तक वापस भेजा जाएगा? इन सवालों के जवाब का इंतजार शिक्षा विभाग के साथ-साथ अभिभावकों और विद्यार्थियों को भी है।
सिस्टम से जवाब मांगते सवाल……..
• अटैचमेंट समाप्त होने के बाद भी शिक्षक किस आदेश के तहत DEO कार्यालय में कार्यरत हैं?
• क्या इन तैनातियों को शासन अथवा सक्षम प्राधिकारी की स्वीकृति प्राप्त है?
• जिन विद्यालयों से ये शिक्षक जुड़े हैं, वहां शिक्षण कार्य की व्यवस्था किस प्रकार संचालित हो रही है?
यदि शासन का आदेश पूरे प्रदेश के लिए समान रूप से लागू है, तो सतना में उसकी अलग तस्वीर क्यों दिखाई दे रही है?









