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प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र पर आज फैसला? हाईकोर्ट के निर्देश पर गांव में मुनादी के बाद बढ़ी हलचल…..

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समिति से मिल सकती है क्लीन चिट, शिकायतकर्ता भी पेश करेंगे साक्ष्य………

मध्य प्रदेश की नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र से जुड़े बहुचर्चित मामले में सोमवार को महत्वपूर्ण सुनवाई होने जा रही है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति सुबह 11 बजे भोपाल स्थित वल्लभ भवन में मामले की सुनवाई करेगी। इससे पहले समिति के निर्देश पर सतना जिले के नागौद तहसील अंतर्गत मंत्री के पैतृक गांव वसुधा में प्रशासन ने डुगडुगी बजवाकर सार्वजनिक मुनादी कराई और ग्रामीणों से साक्ष्य एवं आपत्तियां आमंत्रित कीं।

हाईकोर्ट में कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार द्वारा दायर याचिका के बाद राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति इस मामले की विस्तृत जांच कर रही है। याचिका में दावा किया गया है कि बागरी समुदाय अनुसूचित जाति की सूची में शामिल नहीं है तथा मंत्री प्रतिमा बागरी राजपूत (ठाकुर) समुदाय से संबंध रखती हैं।

 

जांच प्रक्रिया के तहत शुक्रवार को वसुधा गांव में प्रशासनिक अमले ने लाउडस्पीकर के माध्यम से सार्वजनिक मुनादी कराई। ग्रामीणों को बताया गया कि यदि किसी के पास मंत्री के जाति प्रमाण-पत्र अथवा जातीय पहचान से संबंधित कोई तथ्य, दस्तावेज या साक्ष्य हैं तो वे 6 जुलाई 2026 को सुबह 11 बजे भोपाल स्थित अनुसूचित जाति विकास आयुक्त कार्यालय, कक्ष क्रमांक 312 में उपस्थित होकर अपना पक्ष रख सकते हैं। पूरी मुनादी की वीडियोग्राफी भी कराई गई तथा नोटिस तहसील कार्यालय, जनपद पंचायत और ग्राम पंचायतों के नोटिस बोर्ड पर चस्पा किए गए।

इसी बीच राज्य स्तरीय समिति ने मंत्री प्रतिमा बागरी को भी सुनवाई में उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने के निर्देश दिए हैं। सूत्रों के अनुसार मंत्री पक्ष समिति के समक्ष फैमिली ट्री सहित कई दस्तावेज प्रस्तुत करेगा। इन दस्तावेजों में उनके परिवार के सदस्यों के अनुसूचित जाति वर्ग की आरक्षित सीटों से विधायक एवं मंत्री रहने का उल्लेख भी शामिल बताया जा रहा है। इन्हीं आधारों पर मंत्री को समिति से राहत या क्लीन चिट मिलने की संभावना भी जताई जा रही है।

यदि समिति मंत्री के पक्ष में निर्णय देती है तो प्रतिमा बागरी, मोहन सरकार की दूसरी मंत्री होंगी जिन्हें जाति छानबीन समिति से राहत मिलेगी। इससे पहले राज्यमंत्री गौतम टेटवाल को भी समिति क्लीन चिट दे चुकी है, हालांकि उस निर्णय को इंदौर हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है और उसकी अंतिम सुनवाई 21 जुलाई को प्रस्तावित है।

हाईकोर्ट के निर्देश के बाद प्रशासन ने सतना जिले के मंत्री के पैतृक गांव वसुधा, ससुराल अमदरी और उनके परिवार से जुड़े अन्य गांवों में सार्वजनिक मुनादी कर लोगों से आपत्तियां और साक्ष्य आमंत्रित किए थे। अब पूरे मामले पर प्रदेशभर की निगाहें टिकी हैं।

इस बीच गांवों में हुई पड़ताल के दौरान स्थानीय लोगों की राय भी सामने आई। जब हमारी टीम ने गांव के बुजुर्गों से बात की, तो उनका कहना था कि उन्होंने बचपन से बागरी समाज को अनुसूचित जाति के रूप में ही देखा है और वर्षों से समाज के लोगों के एससी प्रमाण-पत्र बने हुए हैं। उनका कहना था कि समाज के लोग आरक्षित वर्ग के तहत चुनाव भी लड़ते रहे हैं और सरकारी सेवाओं में भी इसी आधार पर चयनित हुए हैं।

कुछ ग्रामीणों ने बताया कि उनके समाज में वैवाहिक संबंध भी बागरी समाज के भीतर ही होते हैं और राजपूत समाज से न बेटी दी जाती है और न बहू लाई जाती है। उनका कहना था कि गांव में बागरी समाज की पहचान अनुसूचित जाति के रूप में ही रही है।

युवाओं से बातचीत में भी यही बात सामने आई कि उनके परिवारों के पास वर्षों पुराने जाति प्रमाण-पत्र हैं और उन्हें कभी इस पहचान को लेकर विवाद का सामना नहीं करना पड़ा। हालांकि कुछ लोगों का मानना था कि मौजूदा विवाद राजनीतिक रंग लेने के कारण अधिक चर्चा में आया है।

दूसरी ओर शिकायतकर्ता प्रदीप अहिरवार का दावा है कि वे समिति के समक्ष ऐसे दस्तावेज प्रस्तुत करेंगे, जिनसे मंत्री के राजपूत (ठाकुर) समुदाय से संबंध होने का दावा साबित होता है। उनका कहना है कि 2007 के राजपत्र और अन्य अभिलेखों के आधार पर अनुसूचित जाति का दावा वैध नहीं है।

वहीं मंत्री प्रतिमा बागरी का कहना है कि उनके पास परिवार की कई पीढ़ियों से जुड़े सभी आवश्यक मूल दस्तावेज उपलब्ध हैं, जिन्हें वे समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगी। उनका दावा है कि उनका परिवार पीढ़ियों से इसी क्षेत्र का निवासी है और सभी रिकॉर्ड उनके पक्ष को स्पष्ट करेंगे।

सूत्रों के अनुसार, मंत्री पक्ष फैमिली ट्री सहित कई दस्तावेज भी समिति के समक्ष प्रस्तुत करेगा। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर उन्हें राहत या क्लीन चिट मिलने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम निर्णय राज्य स्तरीय जाति छानबीन समिति की जांच और उसके बाद न्यायालय की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

आज होने वाली सुनवाई में दोनों पक्ष अपने-अपने साक्ष्य और दस्तावेज पेश करेंगे। ऐसे में इस बहुचर्चित मामले में समिति का रुख आगे की कानूनी प्रक्रिया और राजनीतिक चर्चाओं की दिशा तय कर सकता है।

अब सबकी निगाहें आज होने वाली सुनवाई पर टिकी हैं, जहां समिति के समक्ष प्रस्तुत दस्तावेज, साक्ष्य और दोनों पक्षों की दलीलें इस बहुचर्चित मामले की दिशा तय कर सकती हैं।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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