राजनीति की भीड़ में अक्सर रिश्ते पीछे छूट जाते हैं, लेकिन कुछ चेहरे ऐसे होते हैं जो पद और प्रोटोकॉल से ऊपर उठकर अपने आत्मीय संबंधों को जीवित रखते हैं। प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सतना प्रवास के दौरान एक ऐसा ही संदेश दिया, जिसने राजनीतिक गलियारों के साथ आम लोगों के बीच भी खास चर्चा पैदा कर दी।व्यस्त कार्यक्रमों और प्रशासनिक बैठकों के बीच मुख्यमंत्री मोहन यादव अपने पुराने मित्र विजय यादव के डाली बाबा स्थित निवास पहुंचना नहीं भूले। यह मुलाकात भले कुछ समय की रही हो, लेकिन अपने पीछे गहरा संदेश छोड़ गई। मुख्यमंत्री ने यहां पहुंचकर विजय यादव की दिवंगत माताजी को श्रद्धांजलि अर्पित की और परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त कर दोस्ती का वह मान निभाया, जो आज की राजनीति में कम ही देखने को मिलता है।
स्थानीय लोगों के बीच इस मुलाकात को लेकर खास उत्साह दिखाई दिया। लोगों का कहना था कि सत्ता के सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बाद भी मुख्यमंत्री ने अपने पुराने संबंधों को जिस आत्मीयता से निभाया, वह उनकी सादगी और संवेदनशीलता को दर्शाता है। यह सिर्फ एक औपचारिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि रिश्तों के सम्मान का जीवंत उदाहरण बन गई।
राजनीतिक जानकारों की मानें तो मुख्यमंत्री मोहन यादव और विजय यादव के बीच लंबे समय से आत्मीय संबंध रहे हैं। यही विश्वास और संगठन के प्रति समर्पण का परिणाम है कि हाल ही में विजय यादव को चित्रकूट विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई। इस पद के लिए जिले के कई बड़े नेता प्रयासरत थे, लेकिन मुख्यमंत्री ने अपने भरोसेमंद और संगठन के प्रति समर्पित साथी विजय यादव पर विश्वास जताया।
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि विजय यादव के नेतृत्व में चित्रकूट विकास को नई दिशा मिल सकती है। धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण चित्रकूट को विश्व पटल पर नई पहचान दिलाने की जिम्मेदारी अब उनके कंधों पर है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में चित्रकूट का विकास मॉडल प्रदेश ही नहीं, देश के लिए भी उदाहरण बन सकता है।
मुख्यमंत्री की यह आत्मीय मुलाकात एक बार फिर यह संदेश दे गई कि सच्चे रिश्ते पद से नहीं, दिल से निभाए जाते हैं।









