रीवा में आधी रात तालाब से हटाए गए जल सत्याग्रही, आप नेता समेत 4 अस्पताल में भर्ती…

टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में चल रहा था आंदोलन; प्रशासन ने 10 दिन तक परियोजना संबंधी गतिविधियां नहीं होने का मौखिक आश्वासन दिया, लिखित आदेश जारी नहीं…

रीवा जिले के रोझौही में प्रस्तावित टाटा न्यूक्लियर पावर प्लांट के विरोध में चल रहे जल सत्याग्रह को मंगलवार देर रात प्रशासन ने समाप्त कराया। रात करीब 1 बजे प्रशासनिक टीम तालाब पर पहुंची और आम आदमी पार्टी (आप) के नेता प्रमोद शर्मा सहित आदिवासी प्रदर्शनकारियों को बाहर निकलवाया। इसके बाद प्रमोद शर्मा समेत चार लोगों को एंबुलेंस से इलाज के लिए संजय गांधी अस्पताल, रीवा भेजा गया। मौके पर लालगांव पुलिस भी मौजूद रही।
10 दिन तक गतिविधियां नहीं होने का मौखिक आश्वासन…..
प्रदर्शनकारियों को प्रशासन की ओर से मौखिक आश्वासन दिया गया कि अगले 10 दिनों तक रोझौही में परियोजना से संबंधित कोई गतिविधि नहीं होगी। हालांकि, खबर लिखे जाने तक इस संबंध में कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया था।
प्रमोद शर्मा के साथ संदीप कोल, रावेन्द्र कोल और बबली कोल को भी अस्पताल भेजा गया। इससे पहले मदरी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के सीएचओ रविकांत साकेत ने प्रमोद शर्मा की जांच की थी। जांच में उनका ब्लड प्रेशर और शुगर बढ़ा हुआ मिला था। सीएचओ ने लगातार अनशन जारी रहने पर स्वास्थ्य बिगड़ने की आशंका जताई थी।
विमला कोल की मौत के बाद तेज हुआ आंदोलन…..
रोझौही में प्रस्तावित परमाणु बिजली संयंत्र के विरोध में ग्रामीण लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। जल सत्याग्रह के दौरान आदिवासी महिला विमला कोल की तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई थी। इस घटना के बाद ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ गई। प्रदर्शनकारियों ने प्रशासन पर उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेने का आरोप लगाया और विमला की मौत से जुड़े तथ्यों की जांच की मांग की।
उमंग सिंघार ने परिवार को दी एक लाख रुपये की सहायता…..आंदोलन के बीच मध्यप्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सोमवार को रोझौही पहुंचे थे। उन्होंने जल सत्याग्रह कर रहे आदिवासियों से मुलाकात की और विमला कोल के परिजनों को एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता दी।
ग्रामीणों ने उन्हें अपनी समस्याओं से अवगत कराते हुए अधिकारियों पर धमकाने के आरोप लगाए। सिंघार ने परियोजना की जरूरत, ग्रामसभा की सहमति और अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उन्होंने विमला कोल की मौत की जांच कराने की मांग भी की।
जल, जंगल और जमीन पर असर की आशंका..आंदोलनकारियों का कहना है कि जल, जंगल और जमीन उनकी आजीविका का आधार हैं। उनका दावा है कि परियोजना से खेती, जलस्रोत और पर्यावरण प्रभावित हो सकते हैं। उन्होंने भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी जोखिमों को लेकर भी चिंता जताई है। ये प्रदर्शनकारियों की आशंकाएं और आरोप हैं, जिनकी स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में उपलब्ध जानकारी से नहीं होती।
इससे पहले ग्रामीणों ने रोझौही में बोरिंग के लिए पहुंची मशीन का भी विरोध किया था। रोझौही और सरई कला के अलावा महूहा टोला, मदरी, भठवा, पताई पनगड़ी, अतरैला, बांस तथा लालगांव के वार्ड 2 और 3 के ग्रामीण भी परियोजना के विरोध में प्रदर्शन कर चुके हैं।
परियोजना रद्द करने की मांग पर अड़े ग्रामीण….सामाजिक कार्यकर्ता शिवानंद द्विवेदी ने भी ग्रामीणों के बीच पहुंचकर परियोजना रद्द करने की मांग को लेकर राष्ट्रपति के नाम एसडीएम को ज्ञापन सौंपा था। ज्ञापन में जल संकट, खेती, जमीन से जुड़े विवाद और क्योटी जलप्रपात पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंता जताई गई थी।
फिलहाल ग्रामीणों की प्रमुख मांग परियोजना को रद्द करना है। प्रशासन की ओर से 10 दिनों तक परियोजना संबंधी गतिविधियां नहीं होने का मौखिक आश्वासन दिया गया है। अब देखना होगा कि इस आश्वासन पर आगे क्या कार्रवाई होती है और ग्रामीणों की मांगों पर प्रशासन क्या निर्णय लेता है।
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