लाड़ली बहना योजना बंद होगी या नहीं? CM मोहन यादव के ‘बहुत महंगी पड़ गई’ बयान से उठे सवाल, ₹3 हजार की घोषणा पर भी नजर….

भोपाल के रवींद्र भवन में रविवार को हुए बुंदेली समागम के दौरान एक कंटेंट क्रिएटर ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से लाड़ली बहना योजना को लेकर सवाल किया। जवाब में मुख्यमंत्री ने हल्के अंदाज में कहा, “लाड़ली बहना ही बहुत महंगी पड़ गई। मुझे क्या पता था कि मुख्यमंत्री बनते ही इतनी भारी मार पड़ती है।”
मुख्यमंत्री के इस बयान के बाद योजना के भविष्य और महिलाओं को मिलने वाली राशि को लेकर चर्चा तेज हो गई है। हालांकि, उपलब्ध बयानों और सरकार के हालिया फैसलों से फिलहाल यह संकेत नहीं मिलता कि योजना को बंद करने का फैसला लिया गया है।
हर महीने 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को ₹1,500
लाड़ली बहना योजना के तहत फिलहाल 1.25 करोड़ से ज्यादा महिलाओं को हर महीने ₹1,500 दिए जा रहे हैं। 13 सितंबर 2026 को जारी 40वीं किस्त में 1 करोड़ 25 लाख 10 हजार 150 महिलाओं के खातों में ₹1,835 करोड़ से ज्यादा की राशि पहुंचाई गई।
मौजूदा राशि के हिसाब से योजना पर सालाना खर्च करीब ₹22 हजार करोड़ बैठता है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट में इसके लिए ₹23,883 करोड़ का प्रावधान किया गया है।
जून 2023 से सितंबर 2026 तक 40 किस्तों में महिलाओं के खातों में कुल करीब ₹65,396 करोड़ पहुंच चुके हैं।
योजना बंद होने की बात पर सरकार पहले क्या कह चुकी है?
लाड़ली बहना योजना बंद होने की चर्चा पहले भी सामने आती रही है। मार्च 2025 में कांग्रेस ने योजना बंद किए जाने का आरोप लगाया था। उस समय उपमुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जगदीश देवड़ा ने कहा था कि योजना बंद नहीं होगी।
27 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के मौके पर भी योजना को लेकर सरकार की ओर से कहा गया था कि लाड़ली बहना योजना सरकार की जिम्मेदारी है।
इसके अलावा अगस्त 2026 में कैबिनेट ने योजना को अगले पांच साल यानी 2030-31 तक जारी रखने के लिए ₹1,14,365 करोड़ की राशि मंजूर की है।
फिर ₹3,000 की राशि कब होगी?
मुख्यमंत्री मोहन यादव पहले कह चुके हैं कि संकल्प पत्र में महिलाओं को ₹3,000 प्रतिमाह देने का वादा किया गया है और इसे 2028 तक पूरा किया जाएगा। फरवरी 2026 में विधानसभा में भी उन्होंने इसी बात को दोहराया था।
लेकिन मौजूदा बजट प्रावधान करीब ₹22-23 हजार करोड़ सालाना खर्च के आसपास है। यदि लाभार्थियों की संख्या और अन्य परिस्थितियां लगभग समान रहें और राशि ₹1,500 से बढ़ाकर ₹3,000 की जाती है, तो सरकार पर सालाना करीब ₹21 हजार करोड़ का अतिरिक्त वित्तीय भार आ सकता है।

लाभार्थियों की संख्या घटी, लेकिन खर्च बढ़ा
सितंबर 2024 में करीब 1.29 करोड़ महिलाओं को ₹1,574 करोड़ की राशि मिली थी। सितंबर 2026 में लाभार्थियों की संख्या घटकर करीब 1.25 करोड़ हुई, लेकिन किस्त की राशि बढ़ने से कुल भुगतान बढ़कर करीब ₹1,835 करोड़ हो गया।
यानी करीब 4 लाख लाभार्थी कम हुए, लेकिन मासिक भुगतान में लगभग 17% की बढ़ोतरी हुई।
सरकार के सामने वित्तीय चुनौती
लाड़ली बहना योजना पर बढ़ते खर्च के बीच राज्य के बजट पर वित्तीय दबाव की चर्चा भी हो रही है। मध्य प्रदेश का 2026-27 का कुल बजट ₹4,38,317 करोड़ है।
राज्य में सीधे खातों में नकद राशि पहुंचाने वाली योजनाओं पर भी खर्च बढ़ा है। हालांकि, किसी दूसरे विभाग या योजना के बजट में कमी को सिर्फ लाड़ली बहना योजना के कारण जोड़ना सीधे तौर पर सही नहीं होगा, क्योंकि बजट पर वेतन, ब्याज, केंद्रीय योजनाओं और अन्य खर्चों का भी असर पड़ता है।
अभी योजना बंद होने का दावा करना जल्दबाजी
उपलब्ध जानकारी के आधार पर मुख्यमंत्री का ‘महंगी पड़ गई’ वाला बयान योजना के खर्च की ओर इशारा करता है, लेकिन इसे योजना बंद करने की घोषणा नहीं माना जा सकता।
सरकार ने हाल ही में योजना को अगले पांच साल जारी रखने के लिए बड़ा वित्तीय प्रावधान मंजूर किया है। वहीं, ₹3,000 प्रतिमाह करने का वादा भी 2028 तक पूरा करने की बात सरकार की ओर से कही गई है। ऐसे में फिलहाल बड़ा सवाल योजना बंद होने से ज्यादा ₹3,000 की राशि कब और किस वित्तीय व्यवस्था के तहत बढ़ाई जाएगी, यह है।
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