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एक जमीन पर ग्रामीण और वन-राजस्व विभाग का दावा: 12 परिवारों के PM आवास पर स्टे से संकट, बोले-100 साल से रह रहे…

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सीधी में एक जमीन पर ग्रामीण, वन और राजस्व विभाग का दावा,12 परिवारों के PM आवास पर स्टे से संकट, ग्रामीण बोले-100 साल से रह रहे….

सीधी जिले के बहरी क्षेत्र में जमीन के अधिकार को लेकर विवाद सामने आया है। एक ही जमीन पर ग्रामीणों के साथ बैजनाथ द्विवेदी, वन विभाग और राजस्व विभाग के दावे बताए जा रहे हैं। विवाद के चलते जगवती कोल, रामसखा कोल, शकुंतला कोल सहित करीब 12 परिवारों के प्रधानमंत्री आवास निर्माण अटक गए हैं।

ग्रामीणों का आरोप है कि बैजनाथ द्विवेदी के जमीन पर दावा करने के बाद तहसीलदार न्यायालय से स्टे लिया गया, जिसके कारण प्रधानमंत्री आवास का निर्माण रुक गया है।

ग्रामीण बोले- 100 साल से यहां रह रहे

रामसखा कोल का कहना है कि इस विवाद से 20 से अधिक परिवार प्रभावित हैं। ग्रामीणों का दावा है कि वे इस जमीन पर 100 साल से अधिक समय से रह रहे हैं।

ग्रामीणों के मुताबिक, पहले यहां जंगल हुआ करता था और तत्कालीन सीधी कलेक्टर अजीत जोगी के कार्यकाल में परिवारों को पट्टे दिए गए थे। उनका कहना है कि लंबे समय से रहने के बावजूद अब जमीन के अधिकार को लेकर उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

जमीन के रिकॉर्ड को लेकर भी उठे सवाल

ग्रामीणों और सरपंच राजेश साकेत का आरोप है कि बैजनाथ द्विवेदी के नाम पहले करीब 20 एकड़ जमीन थी, लेकिन अब 250 एकड़ से अधिक जमीन उनके नाम होने का दावा किया जा रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि इनमें कई जमीनें पहले मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज थीं। मामले को लेकर तहसीलदार के पास कई बार शिकायत किए जाने की बात भी ग्रामीणों ने कही है।

मारपीट और घर तोड़ने के प्रयास का आरोप

ग्रामीणों ने विवाद के दौरान गाली-गलौज और मारपीट किए जाने का आरोप लगाया है। कुछ ग्रामीणों ने घर तोड़ने के प्रयास का भी दावा किया है। हालांकि, इन आरोपों पर दूसरे पक्ष का पक्ष सामने नहीं आया है।

85 वर्षीय भागीरथी साकेत ने कहा कि उनका जन्म इसी स्थान पर हुआ है। उन्होंने चिंता जताई कि जीवन के अंतिम पड़ाव में उन्हें अपने घर से बेघर होने का डर सता रहा है।

वन विभाग के रिकॉर्ड में जंगल, राजस्व विभाग ने भी बताई जमीन

बहरी रेंज की रेंजर कविता साकेत के अनुसार संबंधित जमीन वन विभाग के रिकॉर्ड में जंगल के रूप में दर्ज है और विभाग के खसरे में आती है।

वहीं, तहसीलदार बहरी हिमांशु शुक्ला ने जमीन को राजस्व विभाग की करीब 15 एकड़ जमीन बताया। उनके अनुसार यह जमीन पहले मध्यप्रदेश शासन के नाम दर्ज थी, लेकिन अब रिकॉर्ड में बैजनाथ द्विवेदी के नाम दिखाई दे रही है। तहसीलदार ने मामले की जांच कराने की बात कही है।

मामले में बैजनाथ द्विवेदी से पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने सामने आकर कोई जवाब नहीं दिया।

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Kishan Gupta
Author: Kishan Gupta

journalist

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