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95 लाख की रिकवरी ने खोली रामपुर नगर परिषद की कार्यप्रणाली की परतें, अब जिम्मेदारों पर कार्रवाई का इंतजार…..

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जेसीबी के भुगतान पर ऑडिट के गंभीर सवाल, 1,450 रुपए प्रति घंटे की दर और अलग डीजल भुगतान पर उठे प्रश्न…..

रामपुर बघेलान। रामपुर नगर परिषद की कार्यप्रणाली और सरकारी राशि के उपयोग को लेकर स्थानीय निधि संपरीक्षा की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आए 95 लाख 34 हजार 358 रुपए की रिकवरी के उल्लेख ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामला जेसीबी मशीन के उपयोग और उसके भुगतान से जुड़ा बताया जा रहा है। अब सवाल सिर्फ रिकवरी की रकम का नहीं, बल्कि उस पूरी भुगतान प्रक्रिया में शामिल ठेकेदार, कर्मचारियों और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका का है।

ऑडिट रिपोर्ट में 95,34,358 रुपए की वसूली का उल्लेख सामने आने के बाद नगर परिषद की कार्यप्रणाली पर सवाल उठना स्वाभाविक है। यदि ऑडिट आपत्तियां और रिकवरी की राशि दस्तावेजों से प्रमाणित होती है, तो यह जांच का विषय है कि भुगतान किस आधार पर किए गए, किस अधिकारी ने उनका सत्यापन किया और भुगतान को किस स्तर पर स्वीकृति मिली।

जानकारी के अनुसार नगर परिषद द्वारा बीके ग्रुप को जेसीबी मशीन उपलब्ध कराने के लिए 1,450 रुपए प्रति घंटे की दर स्वीकृत की गई थी। इसके अलावा डीजल का भुगतान अलग से किए जाने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ऐसे में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि स्वीकृत दर किस प्रक्रिया के तहत तय हुई, बाजार दर का परीक्षण किया गया था या नहीं और मशीन के संचालन तथा डीजल खपत का रिकॉर्ड किस आधार पर सत्यापित किया गया।

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि यदि भुगतान प्रक्रिया नियमों के अनुसार थी, तो इतनी बड़ी राशि की रिकवरी की स्थिति क्यों बनी? और यदि ऑडिट में वित्तीय अनियमितता या अधिक भुगतान से संबंधित आपत्तियां दर्ज हुई हैं, तो संबंधित जिम्मेदारों की जवाबदेही तय करने के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गई?

इसके साथ ही रामपुर क्षेत्र में लंबे समय से पदस्थापना को लेकर भी विश्वजीत कुशवाहा के संबंध में सवाल उठाए जा रहे हैं। करीब 25 वर्षों की पदस्थापना का दावा किया जा रहा है। इसकी पुष्टि यदि सरकारी रिकॉर्ड से होती है, तो लंबे समय तक एक ही क्षेत्र में पदस्थापना को प्रशासनिक स्तर पर भी जांच के दायरे में लिया जाना चाहिए, विशेषकर तब जब उसी निकाय की वित्तीय कार्यप्रणाली को लेकर गंभीर ऑडिट आपत्तियां सामने आई हों।

फिलहाल पूरे मामले में सबसे जरूरी आवश्यकता निष्पक्ष जांच और दस्तावेजों के आधार पर जिम्मेदारी तय करने की है। ऑडिट रिपोर्ट में दर्ज आपत्तियों की वास्तविक स्थिति, रिकवरी की प्रकृति, संबंधित भुगतान और जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका सार्वजनिक होने के बाद ही तस्वीर पूरी तरह स्पष्ट होगी।

सरकारी धन जनता का धन है। इसलिए 95 लाख 34 हजार 358 रुपए की रिकवरी के सवाल पर केवल कागजी जवाब पर्याप्त नहीं होगा। यदि अनियमितता प्रमाणित होती है तो जिम्मेदारों पर नियमानुसार सख्त कार्रवाई और यदि भुगतान नियमसम्मत पाए जाते हैं तो उसका स्पष्ट रिकॉर्ड, दोनों ही स्थिति में जनता को जवाब मिलना जरूरी है।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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