सिविल लाइन तिराहे से अब चित्रकूट रोड तक हो रही चेकिंग पर सवाल, बाहरी टैक्सी-ट्रांसपोर्ट वाहनों पर ज्यादा नजर…!
रेवांचल रोशनी, सतना। सतना में यातायात पुलिस की चेकिंग को लेकर इन दिनों सड़क पर तरह-तरह की चर्चाएं सुनने को मिल रही हैं। मजाकिया अंदाज में लोग कहते हैं कि बाहरी नंबर की गाड़ी दिखाई देते ही जांच कर रहे कुछ जिम्मेदारों की लार ग्रंथियां सक्रिय हो जाती हैं और चेकिंग का उत्साह अचानक बढ़ जाता है। हालांकि इसका सच क्या है, यह तो यातायात विभाग ही बेहतर बता सकता है।
पहले सिविल लाइन तिराहे पर नियमित चेकिंग देखी जाती थी, लेकिन बीते कुछ दिनों से चित्रकूट रोड के आसपास यह नजारा दिखाई दे रहा है। खास बात यह कि बाहरी नंबर वाली टैक्सी, ट्रांसपोर्ट और सामान्य हालत की गाड़ियों को रोकने में विशेष दिलचस्पी दिखाई देती है। वहीं महंगी और चमचमाती गाड़ियों के मामले में वही उत्साह नजर नहीं आता..
लोकल गाड़ियां…….
इसे संयोग माना जाए या चेकिंग का कोई अलग गणित, यह विभाग जाने।
बाहरी वाहन चालकों को रोककर काफी देर तक खड़ा रखने और फिर अलग ले जाकर बातचीत करने की चर्चाएं भी सामने आती हैं। आखिर वह बातचीत नियम-कायदों की होती है या कागजों की, इसका पता तो जांच के बाद ही चलेगा।
बाहरी गाड़ियां…….
यूपी-बिहार की गाड़ी दिखी, चेकिंग की ‘बैटरी’ फुल! सिविल लाइन से गुजरने वाली यूपी, बिहार और झारखंड नंबर की गाड़ियों पर चेकिंग का उत्साह कुछ ज्यादा ही नजर आने की चर्चाएं हैं। सवाल यह कि अगर मकसद नियम और सुरक्षा है तो नियम नंबर प्लेट देखकर बदलते क्यों दिखें?
वसूली की चर्चा भी है… हालांकि सच क्या है यह विभाग बताए। आखिर बाहरी गाड़ियों में ऐसा कौन-सा विशेष गुण है, जो चेकिंग को इतना आकर्षक बना देता है?
लोगों का सवाल बस इतना है कि अगर चेकिंग का मकसद यातायात नियमों का पालन कराना है तो फिर गाड़ी का नंबर देखकर उत्साह में इतना फर्क क्यों? कहीं ऐसा तो नहीं कि बाहरी नंबर प्लेट देखकर चेकिंग का मीटर थोड़ा तेज चलने लगता है?
अब जरूरत है कि पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी चेकिंग प्वाइंट, रोकी जा रही गाड़ियों और कार्रवाई का निष्पक्ष रिकॉर्ड देखकर स्थिति स्पष्ट करें, ताकि वाली व्यवस्था पर उठ रही चर्चाओं पर भी विराम लगे और चेकिंग पर भरोसा भी कायम रहे….