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नस्ल सुधार ने बदली किसान विनोद की किस्मत, घर की बछिया बनी आर्थिक समृद्धि का आधार

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​रायपुर

 ​ग्रामीण अंचलों में अक्सर दैनिक जरूरतों की चीजों के लिए भी लोगों को संघर्ष करना पड़ता है। ऐसा ही कुछ हाल नारायणपुर जिले के धौड़ाई गांव निवासी किसान श्री विनोद नुरेटी का था। उनके परिवार में दूध की रोजाना जरूरत तो थी, लेकिन गांव में उपलब्धता न होने और बाजार में ऊंची कीमतों के कारण उन्हें काफी दिक्कत झेलनी पड़ती थी। परंतु, राज्य सरकार के पशुधन विकास विभाग के मार्गदर्शन और विनोद की मेहनत ने इस समस्या को न सिर्फ खत्म किया, बल्कि उनकी आजीविका की नई राह भी खोल दी।

​कृत्रिम गर्भाधान से नस्ल सुधार की नींव

दूध की समस्या के स्थायी समाधान के लिए विनोद नुरेटी ने पशुधन विकास विभाग से संपर्क साधा। विभागीय सलाह पर उनकी देशी गाय का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया। परिणामस्वरूप, एक उच्च नस्ल की बछिया का जन्म हुआ। देशी नस्ल में सुधार का यह प्रयोग किसान के लिए पहला और सबसे महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

​'उन्नत मादा वत्स पालन योजना' से मिला आर्थिक बल

बछिया के सही पोषण और नस्ल संवर्धन के लिए पशुधन विकास विभाग की उन्नत मादा वत्स पालन योजना के तहत विनोद को 18 हजार रुपये की अनुदान राशि प्रदान की गई। इसके साथ ही विभाग की ओर से समय-समय पर नि:शुल्क पशु चिकित्सा देखभाल और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराई गईं।

​आत्मनिर्भरता और आय का नया जरिया

विभागीय मार्गदर्शन और अनुदान से विनोद ने बछिया की बेहतर देखरेख की, जो समय के साथ एक स्वस्थ और अत्यधिक दुधारू गाय के रूप में विकसित हुई। आज स्थिति यह है कि विनोद के परिवार को न केवल घर पर ही प्रचुर मात्रा में शुद्ध दूध मिल रहा है, बल्कि वे दूध, दही और घी बेचकर हर महीने अतिरिक्त आय भी अर्जित कर रहे हैं।    ​

जो परिवार कल तक दूध की एक-एक बूंद के लिए दूसरों पर निर्भर था, आज वह खुद दूध उत्पादन कर आर्थिक रूप से स्वावलंबी बन चुका है। विनोद नुरेटी के लिए यह योजना केवल एक बछिया के पालन तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसने उनके पूरे परिवार के जीवन में आर्थिक स्थिरता, सुविधा और सम्मान की नई सुबह ला दी है।

Aditya
Author: Aditya

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