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Tata Sons की शेयर बाजार में एंट्री पर बढ़ा विवाद, RBI ने हाई कोर्ट का खटखटाया दरवाजा

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 मुंबई
टाटा संस की संभावित लिस्टिंग को लेकर लंबे समय से चल रही खींचतान के बीच अब भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने अपनी कानूनी तैयारी तेज कर दी है. इसका असर मंगलवार को टाटा ग्रुप की कुछ कंपनियों के शेयरों में भी देखने को मिला, जहां कुछ स्टॉक्स 20% तक चढ़ गए। 

आबीआई ने बॉम्बे हाई कोर्ट में कैविएट याचिका दायर की है. आसान भाषा में समझें तो कैविएट का मतलब है कि अगर इस मामले में कोई याचिकाकर्ता अदालत का दरवाजा खटखटाता है, तो RBI की बात सुने बिना उसके खिलाफ या उसके पक्ष में कोई आदेश जारी न किया जाए। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय बैंक ने इस कैविएट की जानकारी टाटा संस को भी दे दी है. इससे संकेत मिलता है कि RBI इस मामले में संभावित कानूनी चुनौती को लेकर पहले से अपनी स्थिति तैयार रखना चाहता है। 

11 सितंबर के फैसले से बढ़ी हलचल
RBI का यह कदम 11 सितंबर के उस फैसले के बाद आया है, जिसमें केंद्रीय बैंक ने टाटा संस की सर्टिफिकेट ऑफ रजिस्ट्रेशन (CoR) सरेंडर करने की अर्जी खारिज कर दी थी. टाटा संस ने अनरजिस्टर्ड कोर इनवेस्टमेंट कंपनी (CIC) के तौर पर क्लासिफाइड होने के लिए यह आवेदन दिया था. लेकिन अर्जी खारिज होने का मतलब है कि कंपनी पर अपर-लेयर एनबीएफसी से जुड़ा रेगुलेटरी फ्रेमवर्क लागू रहने का रास्ता साफ है. यही वजह है कि टाटा संस की लिस्टिंग का मुद्दा एक बार फिर केंद्र में आ गया है। 

टाटा संस की लिस्टिंग क्यों है जरूरी
इसकी जड़ RBI के अपर-लेयर एनबीएफसी नियमों में है. टाटा संस को RBI की अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की लिस्ट में रखा गया है. इस लिस्ट में शामिल कंपनियों पर अपेक्षाकृत कड़े रेगुलेटरी नियम लागू होते हैं, जिनमें लिस्टिंग से जुड़ी शर्त भी अहम है. यही वजह है कि टाटा संस के लिए निजी कंपनी बने रहना और RBI के नियमों के तहत उसकी लिस्टिंग की अनिवार्यता, दोनों के बीच टकराव का सवाल बना हुआ है। 

यह मामला 2022 से चला आ रहा है
RBI ने 2022 में अपर-लेयर नॉन-बैंक फाइनेंस कंपनियों की सूची जारी की थी. इसमें टाटा संस को कोर इनवेस्टमेंट कंपनी के तौर पर शामिल किया गया था. इसके बाद जून 2026 में नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) के क्लासिफिकेशन के लिए नया प्रिंसिपल-बेस्ड फ्रेमवर्क लाया गया. इसने पहले लागू पैरामेट्रिक मेथडोलॉजी की जगह ली. फिर 6 अगस्त को संशोधित अपर-लेयर NBFC सूची जारी हुई. इसमें भी टाटा संस को बरकरार रखा गया. उस समय RBI ने साफ किया था कि टाटा संस को लिस्ट में बनाए रखना उसकी डी-रजिस्ट्रेशन अर्जी के नतीजे पर कोई असर नहीं डालता. उस समय कंपनी की अर्जी RBI के पास जांच के तहत थी। 

रिपोर्ट के मुताबिक, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा और ज्यादातर ट्रस्टी टाटा संस को निजी कंपनी बनाए रखने के पक्ष में रहे हैं. उनका फोकस शापूरजी पालनजी ग्रुप के साथ हिस्सेदारी के मोनेटाइजेशन को लेकर ऐसा रास्ता निकालने पर रहा है, जिस पर दोनों पक्ष सहमत हों. यानी टाटा संस को शेयर बाजार में लिस्ट कराने के बजाय हिस्सेदारी से जुड़े दूसरे विकल्पों पर भी विचार किया जाता रहा है। 

टाटा ग्रुप के शेयरों में क्यों आया उछाल
इस पूरे घटनाक्रम का असर शेयर बाजार में भी दिखाई दिया. टाटा केमिकल्स और टाटा इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन जैसे कुछ टाटा ग्रुप शेयरों में मंगलवार को 20% तक की तेजी देखने को मिली. रिपोर्ट के मुताबिक, बाजार के कुछ हिस्से में इन शेयरों की तेजी को टाटा संस की संभावित लिस्टिंग से मिलने वाले संभावित फायदे की उम्मीद से जोड़कर देखा जा रहा है. हालांकि, इसे टाटा संस की लिस्टिंग तय होने का संकेत नहीं माना जा सकता. अभी कानूनी और नियामकीय स्तर पर मामला आगे बढ़ना बाकी है। 

Aditya
Author: Aditya

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