सतना जिला अस्पताल में मरीजों का दबाव बढ़ा: 400 बेड पर 550 से ज्यादा भर्ती, शिशु वार्ड में 22 बेड पर 62 बच्चे…

सतना में मौसमी बीमारियों का प्रकोप बढ़ने के साथ ही सरदार वल्लभ भाई पटेल शासकीय जिला अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था पर दबाव बढ़ गया है। अस्पताल की निर्धारित क्षमता 400 मरीजों की है, लेकिन वर्तमान में 550 से ज्यादा मरीज भर्ती हैं। बेड कम पड़ने के कारण कई मरीजों को फ्लोर बेड लगाकर इलाज दिया जा रहा है।
सोमवार को अस्पताल की ओपीडी में 1858 मरीज पहुंचे। इनमें मेडिसिन ओपीडी में सबसे ज्यादा मरीज रहे। वायरल फीवर, वायरल निमोनिया, ब्रोंकाइटिस निमोनिया और स्क्रब टाइफस के मरीज बढ़ने से मेडिसिन के मेल और फीमेल वार्ड में बेड उपलब्ध नहीं हैं। उमस के कारण ओपीडी में मरीजों और उनके परिजनों को बैठने तक की जगह नहीं मिल रही है।
22 बेड के शिशु वार्ड में 62 बच्चे भर्ती
सबसे चिंताजनक स्थिति शिशु वार्ड की है। यहां 22 बेड की क्षमता के मुकाबले 62 बच्चे भर्ती हैं। हालात ऐसे हैं कि फ्लोर पर गद्दे बिछाने के लिए भी जगह कम पड़ रही है। वहीं 9 बेड वाले पीआईसीयू में 22 बच्चे भर्ती हैं। डॉक्टरों के अनुसार कई बच्चों को एक ही बेड पर इलाज देना पड़ रहा है।
शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजीव प्रजापति के मुताबिक शिशु वार्ड और पीआईसीयू में कुल 84 बच्चे भर्ती हैं, जबकि दोनों की संयुक्त क्षमता 31 बच्चों की है। बच्चों में वायरल संक्रमण के साथ स्क्रब टाइफस के मामले भी सामने आ रहे हैं।
वायरल बीमारियों के मरीज बढ़े
मेडिकल स्पेशलिस्ट डॉ. बद्री विशाल सिंह ने बताया कि अस्पताल इन दिनों ओवरक्राउडेड है। वार्ड से लेकर आईसीयू तक मरीजों का दबाव बना हुआ है। वायरल फीवर, स्क्रब टाइफस और ब्रोंकाइटिस निमोनिया के मरीजों की संख्या बढ़ी है। बेड की कमी के चलते मरीजों को फ्लोर बेड लगाकर भर्ती कर उपचार दिया जा रहा है।
अस्पताल में बढ़ते मरीजों के बीच शिशु वार्ड और पीआईसीयू में क्षमता से कई गुना अधिक बच्चों की भर्ती ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।









