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ऐशबाग ओवरब्रिज के खतरनाक मोड़ पर PWD की तैयारी तेज, बैरिकेड्स और बुलडोजर पहुंचे

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 भोपाल

अजूबे मोड़ के कारण देशभर में किरकिरी करा चुके ऐशबाग 90 डिग्री आरओबी (रेलवे ओवरब्रिज) के सुधार कार्य की हलचल शुरू हो गई है। मौके पर बैरिकेड्स लगा दिए गए हैं और बुलडोजर भी तैनात कर दिया गया है, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि वास्तविक निर्माण कार्य अभी भी फाइनल डिजाइन और सामग्री के इंतजार में अटका हुआ है। जब डिजाइन को लेकर मुख्य अभियंता गोपाल सिंह से पूछा तो उन्होंने इस पर चुप्पी साध ली और कार्यपालन यंत्री एआर से बात करने का कह कर पल्ला झाड़ लिया।

ग्राउंड पर मौजूद कर्मचारियों ने बताया कि अभी तक उनके पास डिजाइन नहीं पहुंचा है। फिलहाल केवल जमीन समतल करने के निर्देश मिले हैं। इसके बाद ले-आउट डाला जाएगा और फिर पीडब्ल्यूडी और रेलवे के इंजीनियरों के संयुक्त मुआयने के बाद ही खोदाई का काम शुरू हो सकेगा।

2.5 मीटर तक बढ़ेगा रेडियस

ब्रिज के खतरनाक मोड़ को सुगम बनाने के लिए केंद्रीय सड़क अनुसंधान संस्थान से नया डिजाइन तैयार कराया गया है। इसके तहत मोड़ के इनर और आउटर रेडियस को 2 से 2.5 मीटर तक बढ़ाया जाएगा, जो वर्तमान में 10.5 मीटर है। इसके अलावा मोड़ के प्रवेश और निकास द्वार पर कैरिजवे को 3 से 3.5 फीट तक चौड़ा किया जाएगा। वहीं अतिरिक्त स्लैब का भार संभालने के लिए दो नए पिलर बनाए जाएंगे। स्ट्रक्चरल बदलाव की जद में आ रहे नाले को डायवर्ट किया जा चुका है।

डिजाइन पर साधी चुप्पी, ईई ने नहीं दिया जवाब

ब्रिज के मुख्य अभियंता गोपाल सिंह ने बताया कि सुधार कार्य की सभी तकनीकी अड़चनें दूर कर ली गई हैं। हालांकि डिजाइन की विस्तृत जानकारी के लिए जब संबंधित कार्यपालन यंत्री (ईई) एआर मोरे से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने न तो फोन उठाया और न ही मैसेज का जवाब दिया। मुख्य अभियंता के अनुसार मूल निर्माण एजेंसी ही करीब एक करोड़ रुपये की लागत से यह सुधार करेगी। रेलवे ट्रैक और ओवरहेड इक्विपमेंट की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरा काम रेलवे की सीधी निगरानी में होगा।

 

Aditya
Author: Aditya

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