पद, प्रतिष्ठा और सोशल मीडिया के दिखावे की दौड़ में कहीं इंसान अपनी असली पहचान तो नहीं खो रहा?

नेहा पच्चीसिया प्रकरण ने संघर्ष, सफलता और लालच के बीच खड़ा किया बड़ा सवाल…..
भोपाल। कुछ कहानियां सिर्फ खबर नहीं होतीं, वे समाज को आईना दिखाती हैं। कटनी की सीएसपी नेहा पच्चीसिया से जुड़ा मामला भी ऐसी ही एक कहानी है, एक सामान्य शिक्षक परिवार की बेटी, मां का संघर्ष, पढ़ाई के लिए परिवार से जिद, एयर होस्टेस की नौकरी छोड़कर MPPSC की तैयारी, परीक्षा में 20वीं रैंक और फिर पुलिस अधिकारी बनने तक का सफर। लेकिन आज उसी सफर पर गंभीर आरोपों का साया है।

नेहा पच्चीसिया ने एक इंटरव्यू में अपने संघर्ष का जिक्र करते हुए बताया था कि उनकी मां बेटियों को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए कितनी दृढ़ थीं। पचोर में बेहतर अंग्रेजी माध्यम स्कूल में पढ़ाने की इच्छा पूरी करने के लिए मां ने कथित तौर पर तीन दिन तक खाना तक नहीं खाया था। परिवार की सीमित परिस्थितियों से निकलकर बेटी ने मेहनत की, सफलता हासिल की और पुलिस सेवा में पहुंची। यह निश्चित रूप से किसी भी माता-पिता के लिए गर्व का क्षण रहा होगा।
लेकिन कटनी में हत्या के एक मामले से जुड़े कथित जमीन सौदे और पैसों की मांग के आरोपों ने इसी सफलता की कहानी को एक अलग मोड़ दे दिया।
शिकायत में हत्या के आरोपी को राहत दिलाने और मामले में मदद करने के नाम पर पैसों की मांग के आरोप लगाए गए। जमीन को कथित तौर पर वास्तविक कीमत से काफी कम में लेने के प्रयास की बात भी सामने आई। मामले में एफआईआर दर्ज हुई और कार्रवाई के तहत निलंबन की जानकारी सामने आई है। हालांकि इन आरोपों का अंतिम सच जांच और न्यायालय की प्रक्रिया से ही तय होगा।
यहां सवाल सिर्फ नेहा पच्चीसिया का नहीं है। सवाल हम सबका है……
आज सोशल मीडिया के दौर में हर व्यक्ति अपनी जिंदगी का सबसे अच्छा हिस्सा दुनिया को दिखाना चाहता है। महंगी गाड़ी, बड़ा पद, शानदार तस्वीरें, उपलब्धियां और अपनी सफलता का प्रदर्शन, इन सबके बीच कई बार हम यह भूल जाते हैं कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली चमक और वास्तविक जीवन की सच्चाई अलग होती है।










