स्वतंत्रता दिवस पर सतना केंद्रीय जेल से 12 बंदियों की रिहाई, गीता और पौधा भेंट कर दी विदाई….

सतना। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सतना केंद्रीय जेल से 12 बंदियों को रिहा किया गया। इन सभी ने अपनी सजा पूरी कर ली थी। अब वे जेल से बाहर निकलकर स्वतंत्र जीवन की नई शुरुआत करेंगे।

राज्य शासन को कुल 13 बंदियों की रिहाई का प्रस्ताव भेजा गया था, लेकिन एक वृद्ध बंदी की पैरोल के दौरान मृत्यु हो जाने के कारण 12 बंदियों को ही रिहा किया जा सका। रिहाई के दौरान प्रत्येक बंदी को श्रीफल, श्रीमद् भगवद्गीता, फलदार पौधा, लंच पैकेट, बंदी पारिश्रमिक पासबुक और रिहाई प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
जेल प्रशासन की ओर से दी गई इन भेंटों के जरिए आध्यात्म, पर्यावरण संरक्षण और प्रकृति से जुड़ाव का संदेश दिया गया। केंद्रीय जेल अधीक्षक लीना कोस्टा ने रिहा हुए बंदियों को अपराध से दूर रहने, सदमार्ग पर चलने और समाज की मुख्यधारा से जुड़कर जिम्मेदार नागरिक के रूप में जीवन जीने की सलाह दी।
रिहा होने वालों में सोमू कोल, लालजी कुशवाहा, कमलेश उर्फ नंदलाल उर्फ चब्बू मवासी, पप्पू बसोर, संतोष उर्फ चार्ली आदिवासी, राजकुमार उर्फ चुनकू लोध, राजाराम अहिर, रामसिंह महदेले, बैजनाथ राजपूत, नंदकिशोर अहिरवार, रन्धीर लोधी और आशीष उर्फ बाबा तिवारी शामिल हैं।
इन 12 बंदियों में सतना जिले के 3, पन्ना के 5 और छतरपुर जिले के 4 बंदी शामिल हैं। स्वतंत्रता दिवस पर मिली यह रिहाई उनके लिए जीवन की नई शुरुआत और समाज की मुख्यधारा में लौटने का अवसर है।
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