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MP में सड़क हादसों का डरावना आंकड़ा! महज 18 माह में 90 हजार दुर्घटनाएं, 25 हजार ने गंवाई जान

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भोपाल 
मध्य प्रदेश सड़क हादसों का गढ़ बन चुका है। यहां सड़कों पर यात्री सुरक्षा और ट्रैफिक नियमों के अनुशासन पर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसा हम नहीं कह रहे, बल्कि पुलिस मुख्यालय की रिपोर्ट बताती है कि, जनवरी 2025 से 7 जुलाई 2026 के बीच ही राज्य में 90,138 सड़क हादसे हो चुके हैं। इससे भी ज्यादा हैरानी की बात ये है कि, इन हादसों में 25,869 लोगों की मौत हो गई है, जबकि 95,843 लोग घायल हुए हैं। यानी औसतन रोजाना करीब 47 लोग सड़क हादसों में मारे जा रहे हैं। जबकिस 166 घायल हो रहे हैं।

वहीं, जिला स्तर पर सड़क हादसों पर गौर करें इंदौर जिला इनमें सबसे आगे है। 18 महीने में यहां 5,404 सड़क हादसों में 4,443 लोग घायल हुए हैं, जबकि 441 मौतें हुई हैं। वहीं, भोपाल की बात करें तो यहां 4,121 हादसों में 316 की जान गई। जबलपुर में 5,333 हादसों में सबसे ज्यादा 993 मौतें हुईं।

हादसों की संख्या में इंदौर और जबलपुर के बीच ज्यादा अंतर नहीं है, लेकिन मृतकों के मामले में जबलपुर आगे है। खास बात ये है कि, भिंड जिले में 1169 हादसों में 1287 लोगों की मौतें हुईं हैं। यहां हर हादसे में एक या अधिक मौतें जरूर हुईं हैं। धार जिले में 3426 हादसों में 1017 मौंतें हुईं हैं।

अलग से सचिवालय बनाने की तैयारी
प्रदेश में हो रहे सड़क हादसे इस कदर आउट ऑफ कंट्रोल हो चुके हैं कि, अब यहां सड़क हादसों को रोकने के लिए जल्द ही सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने की तैयारी की जा रही है। इसमें एक छत के नीचे पीडब्ल्यूडी, एनएचआई, एमपीआरडीसी और स्वास्थ्य समेत सड़क सुरक्षा से जुड़े विभाग के अफसर साथ काम करेंगे। इसकी लीडिंग एजेंसी परिवहन विभाग है।

निवाड़ी में सबसे कम हादसे, पांढुर्णा में सबसे कम मौतें
इसके अलावा प्रदेश के निवाड़ी जिले में 296 सड़क दुर्घटनाओं में 91 मौतें हुईं हैं। वहीं, पांढुर्णा में 295 हादसों में 153 लोगों की मौत हो गई है। जानकारों की मानों तो छोटे जिलों में वाहनों की संख्या और यातायात दबाव कम होने से भी सड़क हादसों से जुड़े आंकड़े कम हैं।

राहत इतनी ही- भोपाल-इंदौर में हादसे ज्यादा, मौतें कम
भोपाल और इंदौर में हादसों की संख्या अन्य जिलों की तुलना में बहुत अधिक है। रिपोर्ट के अनुसार, 18 महीने की अवधि में भोपाल में 4,121 और इंदौर में 5,404 हादसे हुए हैं। लेकिन, मौतों का आंकड़ा क्रमश: 316 और 441 रहा है। वहीं, धार, जबलपुर और सागर जिले में दुर्घटनाओं के मुकाबले मौतों का अनुपात बहुत अधिक है। इससे ग्रामीण और हाईवे क्षेत्रों में होने वाले हादसों की गंभीरता का संकेत मिलता है। ऐसे में जिम्मेदारों को बड़े शहरों के साथ-साथ ग्रामीण और हाईवे वाले क्षेत्रों में अधिक ध्यान और व्यवस्थाएं करने की आवश्यक्ता है।

Aditya
Author: Aditya

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