भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार ने युवाओं के हित में बड़ा फैसला लेते हुए शिक्षा और रोजगार से जुड़े मामलों के त्वरित निपटारे के लिए प्रदेश में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित करने की घोषणा की है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि भोपाल, इंदौर, ग्वालियर और जबलपुर में इन विशेष अदालतों की स्थापना की जाएगी, जहां शिक्षा और रोजगार से जुड़े मामलों की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई होगी।

मुख्यमंत्री ने पन्ना में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पेपर लीक मामलों के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट की घोषणा के बाद राज्य सरकार ने भी इस दिशा में ठोस कदम उठाने का निर्णय लिया है। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मामलों में वर्षों तक इंतजार करना उचित नहीं है और उन्हें समय पर न्याय मिलना चाहिए।
वर्तमान में शिक्षा और रोजगार से जुड़े मामलों की सुनवाई सामान्य अदालतों में होती है, जिसके कारण कई मामलों के निपटारे में लंबा समय लग जाता है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद इन मामलों की सुनवाई तेज होगी और लंबित प्रकरणों का जल्द निपटारा होने की उम्मीद है।
राज्य सरकार का मानना है कि विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनने से न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी होगी, लंबित मामलों का बोझ कम होगा और प्रतियोगी परीक्षाओं, भर्ती प्रक्रियाओं तथा शिक्षा संबंधी विवादों में युवाओं को समयबद्ध राहत मिल सकेगी। इस फैसले को प्रदेश के लाखों छात्रों, प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थियों और रोजगार की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
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