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नए निजी स्कूलों को बड़ी राहत, दिल्ली सरकार ने बदले मान्यता नियम

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नई दिल्ली
दिल्ली में अब प्राइवेट स्कूल खोलने के लिए 'एसेंशिएलिटी सर्टिफिकेट' की अनिवार्यता खत्म कर दी गई है। इसकी जगह सेल्फ सर्टिफिकेशन प्रणाली लागू करने का फैसला लिया है। शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह फैसला दिल्ली स्कूल एजुकेशन रेगुलेशंस (DSER), 1973 के तहत लंबे समय से लागू प्रशासनिक प्रतिबंधों को समाप्त करेगा।

फैसले पर क्या है सरकार का कहना
यह निर्णय नियमों को सरल और अनावश्यक प्रक्रियाओं को कम करने के लिए गठित हाई लेवल कमिटी की सिफारिशों के आधार पर लिया गया है। सरकार का कहना है कि इससे स्कूलों को मान्यता देने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और आरटीई कानून के अनुरूप बनेगी। आशीष सूद ने कहा कि शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 के अनुसार किसी स्कूल की मान्यता उसके बुनियादी मानकों, जैसे पर्याप्त आधारभूत संरचना, सुरक्षा व्यवस्था, योग्य शिक्षक और छात्र-शिक्षक अनुपात के आधार पर तय होनी चाहिए।

दो पुरानों में किए बदलाव
कानून में किसी क्षेत्र में नए स्कूल की आवश्यकता या पहले से मौजूद स्कूलों की संख्या के आधार पर मान्यता देने या रोकने का कोई प्रावधान नहीं है। इसी कारण DSER, 1973 के संबंधित प्रावधानों में संशोधन किया जा रहा है। सरकार ने दो प्रमुख नियमों में बदलाव किया है।

सरकार ने बदला पहला नियम
पहला, नया स्कूल खोलने के इच्छुक संस्थान को सरकार को पहले से नोटिस देना पड़ता था और सरकार यह तय करती थी कि उस क्षेत्र में नए स्कूल की जरूरत है या नहीं। अब यह शर्त समाप्त कर दी गई है।

क्या है दूसरा नियम
दूसरा, मान्यता से पहले क्षेत्र में संचालित स्कूलों की संख्या के आधार पर 'वास्तविक आवश्यकता' का आकलन किया जाता था, जिसे भी खत्म कर दिया गया है। प्राइवेट स्कूलों के लिए निर्धारित न्यूनतम भूमि क्षेत्र की अनिवार्यता में भी राहत दी गई है। सुरक्षा से जुड़े मानक पहले की तरह लागू रहेंगे।

लंबे समय से हो रही थी ये मांग
एसेंशिएलिटी सर्टिफिकेट की अनिवार्यता खत्म करने की मांग भी लंबे समय थी क्योंकि कई स्कूल के लिए यह अड़ंगा बन रहा था। एक तय दूरी से पास अगर दूसरा स्कूल है, तो यह सर्टिफिकेट लेना पडता था। दूसरा, लंबे समय से स्कूल संगठन जैसे दिल्ली स्टेट पब्लिक स्कूल्स मैनेजमेंट असोसिएशन समेत लो बजट स्कूलों की ओर से न्यूनतम भूमि क्षेत्र की अनिवार्यता को लेकर सरकार से मांग कर रहे थे। प्राइवेट जमीन में बनने वाले अधिकांश स्कूल जगह की कमी, महंगे किराए को लेकर इसकी जरूरत बताते रहे हैं।

Aditya
Author: Aditya

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