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दतिया चुनावी रणनीति: विरोध के बीच भाजपा का संगठन मजबूत, बूथ मैनेजमेंट और सामाजिक समीकरणों पर फोकस

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दतिया 

 दतिया विधानसभा उपचुनाव अब भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस के बीच प्रतिष्ठा की लड़ाई में बदलता जा रहा है। दोनों दलों के लिए यह चुनाव केवल एक सीट जीतने का सवाल नहीं, बल्कि आगामी नगरीय निकाय और विधानसभा चुनावों से पहले राजनीतिक संदेश देने का अवसर भी है। टिकट वितरण के बाद पैदा हुए असंतोष के बावजूद भाजपा ने संगठन, बूथ प्रबंधन और सामाजिक समीकरणों पर पूरा फोकस कर शुरुआती बढ़त बनाने की कोशिश शुरू कर दी है।

वहीं कांग्रेस इस चुनाव को विजयपुर उपचुनाव की रणनीति के आधार पर लड़ने की तैयारी कर रही है। भाजपा ने आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित करने के साथ ही उठे राजनीतिक बंवडर को कंट्रोल करने के साथ ही चुनावी प्रबंधन को वार्ड और बूथ स्तर तक सक्रिय कर दिया है। पार्टी का पूरा जोर बूथ को मजबूत करने, सामाजिक संगठनों तक पहुंच बढ़ाने और प्रभावशाली जातीय नेतृत्व को चुनावी अभियान से जोड़ने पर है।

मुख्य मुकाबला आशुतोष तिवारी और घनश्याम सिंह के बीच
ग्वालियर-चंबल अंचल के मंत्रियों, सांसदों और विधायकों को अलग-अलग क्षेत्रों की जिम्मेदारी दी जा रही है। मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की प्रस्तावित सभाओं के माध्यम से भाजपा चुनाव प्रचार को निर्णायक बढ़त देने की रणनीति पर काम कर रही है।

मुख्य मुकाबला भाजपा के आशुतोष तिवारी व कांग्रेस के घनश्याम सिंह के बीच है। चुनाव में दामोदार यादव व किन्नर अखाड़े के महामंडलेश्वर संजना नंद गिरी महाराज भी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए मैदान में हैं।

फिलहाल इनको चुनाव प्रबंधन के लिए उतारा
भाजपा कुशल रणनीतिकार उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, चुनाव प्रभारी सांसद भारत सिंह कुशवाह, उद्यानिकी मंत्री नारायण सिंह कुशवाह, प्रदेश मीडिया प्रभारी आशीष ऊषा अग्रवाल, सांसद संध्या राय, पूर्व मंत्री इमरती देवी, अपेक्स के अध्यक्ष महेंद्र सिंह यादव, रणवीर रावत, पूर्व मंत्री अरविंद भदौरिया सहित भाजपा के कई प्रदेशस्तरीय नेता दतिया कैंप किए हुए हैं।

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Author: Aditya

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