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बेलगड़िया में रोजगार के नए अवसर, बनेगा स्किल सेंटर और शॉपिंग कॉम्प्लेक्स

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 धनबाद
झरिया के पुनर्वासित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल करते हुए झरिया पुनर्वास एवं विकास प्राधिकार ने कुल नौ करोड़ 91 लाख 90 हजार रुपये की तीन विकास परियोजनाओं को धरातल पर उतारा जाएगा। विभाग की और से शनिवार को ई-टेंडर जारी किया गया।

इन परियोजनाओं के तहत कर्माटांड़ में आधुनिक सामुदायिक भवन, बेलगड़िया फेज चार में स्किल डेवलपमेंट सेंटर तथा बेलगड़िया में 80 दुकानों वाला शपिंग काम्प्लेक्स बनाया जाएगा।

पुनर्वास का उद्देश्य केवल लोगों को नया आवास उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि उन्हें रोजगार, सामाजिक सुविधाएं और सम्मानजनक जीवन का आधार देना भी है। इसी सोच के तहत इन तीनों परियोजनाओं को प्राथमिकता दी गई है।सभी परियोजनाएं छह से 11 माह के भीतर पूरी करने का लक्ष्य रखा गया है।

कर्माटांड़ में बनेगा आधुनिक सामुदायिक भवन
कर्माटांड़ टाउनशिप में 1 करोड़ 78 लाख 50 हजार 858 रुपये की लागत से आधुनिक सामुदायिक भवन का निर्माण कराया जाएगा। यह कार्य छह माह में पूरा करने का लक्ष्य है।

भवन बनने के बाद क्षेत्र के लोगों को विवाह, सामाजिक कार्यक्रम, बैठक, सांस्कृतिक आयोजन और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए स्थानीय स्तर पर बेहतर सुविधा उपलब्ध होगी। अभी ऐसी सुविधाओं के लिए लोगों को दूसरे क्षेत्रों का सहारा लेना पड़ता है।

बेलगड़िया में पांच ब्लॉक बनेंगे कौशल विकास केंद्र
बेलगड़िया फेज-4 के पांच मौजूदा आवासीय ब्लॉकों को 2 करोड़ 15 लाख 92 हजार 144 रुपये की लागत से स्किल डेवलपमेंट सेंटर में विकसित किया जाएगा। यह कार्य भी छह माह में पूरा होगा। यहां युवाओं को कंप्यूटर, सिलाई, इलेक्ट्रिशियन, वेल्डिंग समेत विभिन्न रोजगारपरक प्रशिक्षण दिए जाएंगे।

इससे विस्थापित युवाओं और महिलाओं को घर के नजदीक ही कौशल प्रशिक्षण प्राप्त होगा, जिससे स्वरोजगार और निजी क्षेत्र में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।

80 दुकानों वाला शापिंग काम्प्लेक्स बनेगा
बेलगड़िया में दो अलग-अलग स्थानों पर 4 करोड़ 96 लाख 69 हजार 628 रुपये की लागत से 80 दुकानों और दो बड़े हाल वाला शापिंग काम्प्लेक्स बनाया जाएगा।

काम्प्लेक्स बनने से पुनर्वासित परिवारों को व्यापार के नए अवसर मिलेंगे। स्थानीय स्तर पर बाजार विकसित होने से लोगों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए दूसरे शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिलेगी।

 

Aditya
Author: Aditya

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