आरोपी को कानूनी कार्रवाई से बचाने के लिए फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप, नायब तहसीलदार समेत सात लोगों पर गिरेगी जांच की गाज।

भिंड। मध्य प्रदेश के भिंड जिले में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनाकर एक आरोपी को कानूनी कार्रवाई से बचाने के मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) निधि नीलेश श्रीवास्तव ने सख्त रुख अपनाया है। न्यायालय ने थाना सिटी कोतवाली को मामले में सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
कोर्ट ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धाराओं 336(2), 336(3), 340(1) और 340(2) के तहत प्रकरण दर्ज करने का आदेश दिया है। यह आदेश गौरव शर्मा द्वारा दायर परिवाद पर सुनवाई के बाद जारी किया गया।
परिवाद में आरोप लगाया गया था कि विमल यादव के लिए फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर उसे एक अन्य आपराधिक मामले में राहत दिलाने की कोशिश की गई। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया इसे सुनियोजित साजिश मानते हुए पुलिस जांच आवश्यक बताई।
कोर्ट के आदेश के दायरे में तत्कालीन नायब तहसीलदार, सचिव, पटवारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सहित कुल सात लोगों के नाम शामिल हैं। पुलिस अब संबंधित दस्तावेजों की जांच, सरकारी रिकॉर्ड का सत्यापन और सभी आरोपियों की भूमिका की विस्तृत पड़ताल करेगी।
न्यायालय के इस आदेश के बाद राजस्व एवं पंचायत विभाग में हड़कंप मच गया है। मामले की जांच के बाद दोषियों के खिलाफ आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।










