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हमारे यहां खाना नहीं खाते ठाकुर-ब्राह्मण- मंत्री प्रतिमा बागरी के बयान पर सतना में चर्चा तेज, क्षेत्रवासियों ने उठाए सवाल!…….

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सतना/भोपाल। एक दैनिक अखवार मे छपी खबर अनुसार…. मध्य प्रदेश की राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी द्वारा जाति प्रमाण-पत्र की जांच के दौरान दिया गया यह कथन कि आज भी ठाकुर, ब्राह्मण और राजपूत समाज के कई लोग हमारे यहां भोजन नहीं करते, अब राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय बन गया है। जहां उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने उनके अनुसूचित जाति (एससी) प्रमाण-पत्र को वैध माना है, वहीं उनके इस बयान को लेकर सतना जिले और रैगांव विधानसभा क्षेत्र में तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

खबर के अनुसार, मंत्री ने समिति के समक्ष अपने पक्ष में वर्ष 1916 से जुड़े राजस्व अभिलेख, प्रयागराज की वंशावली सहित कई दस्तावेज प्रस्तुत किए। समिति ने इन अभिलेखों और अन्य तथ्यों के आधार पर उनके एससी प्रमाण-पत्र को वैध माना। लेकिन चर्चा का केंद्र उनके दस्तावेज नहीं, बल्कि ब्राह्मण और ठाकुर समाज को लेकर दिया गया बयान बन गया है।

अखवार की खबर पढ़ने के बाद रैगांव विधानसभा समेत क्षेत्र के कई लोगों का कहना है कि मंत्री प्रतिमा बागरी स्वयं विभिन्न ब्राह्मण, क्षत्रिय (ठाकुर) तथा अन्य समाजों के परिवारों में आयोजित शादी-विवाह, धार्मिक कार्यक्रमों और शुभ अवसरों पर आमंत्रित होती हैं और उनमें शामिल भी होती हैं। इसी प्रकार यदि मंत्री के यहां कोई सामाजिक या पारिवारिक कार्यक्रम होता है, तो उसमें भी सभी समाजों के लोग पहुंचते हैं। ऐसे में पूरे समाज के संदर्भ में इस तरह का बयान देना लोगों को उचित नहीं लग रहा।

क्षेत्र के लोगों का मानना है कि बदलते सामाजिक परिवेश में विभिन्न समाजों के बीच पहले की तुलना में अधिक मेल-जोल और सहभागिता बढ़ी है। ऐसे समय में मंत्री द्वारा दिए गए इस प्रकार के बयान सामाजिक समरसता को प्रभावित कर सकते हैं। कई लोगों का कहना है कि मंत्री का यह बयान अनावश्यक विवाद को जन्म देने वाला है और इससे समाजों के बीच दूरी बढ़ने की आशंका पैदा होती है।

जिले भर में यह चर्चा भी है कि यदि कभी किसी व्यक्ति या कुछ स्थानों पर अगर भेदभाव की घटनाएं हुई हों, तो उन्हें पूरे ब्राह्मण या ठाकुर समाज से जोड़कर प्रस्तुत करना उचित नहीं माना जा सकता। लोगों का कहना है कि सार्वजनिक जीवन में रहने वाले जनप्रतिनिधियों से अपेक्षा की जाती है कि वे समाज को जोड़ने वाले संदेश दें, न कि ऐसे बयान जिनकी अलग-अलग व्याख्या हो सके।

उधर, मंत्री प्रतिमा बागरी ने समिति के समक्ष दिए गए अपने तर्कों को सही बताते हुए कहा है कि उन्होंने जो तथ्य रखे, वे उनके पक्ष और दस्तावेजों का हिस्सा थे। वहीं शिकायतकर्ता ने समिति के फैसले को न्यायालय में चुनौती देने की बात कही है।

फिलहाल, सतना जिले और रैगांव विधानसभा क्षेत्र में चर्चा इस बात की अधिक है कि क्या मंत्री का हमारे यहां ठाकुर-ब्राह्मण खाना नहीं खाते वाला बयान आवश्यक था। क्षेत्र के कई लोगों का मानना है कि समाज को जोड़ने की जिम्मेदारी जनप्रतिनिधियों की होती है और ऐसे संवेदनशील विषयों पर शब्दों का चयन अत्यंत संतुलित होना चाहिए।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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