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NRI मेडिकल सीटों पर MP सरकार का बड़ा फैसला, अब कानूनी गार्जियन होने का सबूत देना होगा

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 भोपाल
 मध्य प्रदेश सरकार चिकित्सा शिक्षा प्रवेश प्रक्रिया में एक बड़ा बदलाव करने जा रही है। शैक्षणिक सत्र 2026 से एमबीबीएस (MBBS) और पोस्ट ग्रेजुएट (PG) पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए अलग-अलग नियम लागू किए जाएंगे। इस नए बदलाव का मुख्य उद्देश्य एनआरआई (NRI) कोटे के गलत इस्तेमाल को रोकना और पात्रता शर्तों को कड़ा करना है। सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों के आधार पर अब राज्य में एनआरआई कोटे के लिए 'ब्लड रिलेशन' को स्पष्ट रूप से परिभाषित कर दिया गया है।

उम्मीदवार को दिखाना होगा वास्तविक अभिभावक का सबूत
अब कोई भी छात्र महज किसी एनआरआई रिश्तेदार के नाम का हवाला देकर इस कोटे का लाभ नहीं उठा सकेगा। नए नियमों के तहत उम्मीदवारों को यह कानूनी रूप से साबित करना होगा कि संबंधित एनआरआई व्यक्ति ही उनका वास्तविक अभिभावक है। इसके लिए छात्रों को एक शपथ-पत्र के साथ 'गार्जियन एंड वार्ड्स एक्ट, 1890' के तहत कानूनी अभिभावक होने का प्रमाण पत्र भी जमा करना होगा।

न्यायिक गाइडलाइन के अनुसार, इस कोटे का लाभ केवल उन्हीं उम्मीदवारों को मिलेगा जिनके माता-पिता, सगे भाई-बहन, दादा-दादी, चाचा-चाची, मामा-मामी या प्रथम श्रेणी के चचेरे/ममेरे भाई-बहन वास्तविक रूप से एनआरआई हैं और विदेश में रहते हैं।

प्रस्ताव को उपमुख्यमंत्री से मिल चुकी है मंजूरी
चिकित्सा शिक्षा विभाग के इस प्रस्ताव को राज्य के उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला की सैद्धांतिक मंजूरी मिल चुकी है और फिलहाल इसे कानूनी समीक्षा के लिए भेजा गया है। मेडिकल काउंसलिंग कमेटी आगामी नीट-यूजी (NEET-UG) और पीजी काउंसलिंग सत्र 2026-27 से इस नई व्यवस्था को प्रभावी बनाने की तैयारी में है।
इसके साथ ही, प्रशासन शुरुआती दो चरणों के बाद बचने वाली सीटों के लिए होने वाली कॉलेज लेवल काउंसलिंग (CLC) को भी ऑनलाइन मोड में आयोजित करने की योजना बना रहा है। काउंसलिंग प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने और सीटों को बेवजह ब्लॉक करने या बीच में कोर्स छोड़ने की प्रवृत्ति को रोकने के लिए 'सीट लीविंग बॉण्ड' के तहत जुर्माने के नियमों को भी और अधिक स्पष्ट किया जाएगा।

Aditya
Author: Aditya

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