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पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन की विरासत को राष्ट्रीय सम्मान, मरणोपरांत मिला लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड……

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सामुदायिक नेत्र सेवा को नई पहचान देने वाले महान चिकित्सक को श्रद्धांजलि, पुत्र डॉ. इलेश जैन ने ग्रहण किया सम्मान……

 

सतना/चित्रकूट। विंध्य ही नहीं बल्कि पूरे देश में नेत्र चिकित्सा और मानवीय सेवा का पर्याय बने पद्मश्री स्वर्गीय डॉ. बी.के. जैन को उनके अतुलनीय योगदान के लिए मरणोपरांत ‘लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड‘ से सम्मानित किया गया। बेंगलुरु स्थित शंकरा आई हॉस्पिटल में आयोजित विजन-2020 द राइट टू साइट इंडिया के राष्ट्रीय समारोह में यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया गया।

इस अवसर पर देश-विदेश की लगभग 180 प्रमुख नेत्र चिकित्सा एवं सामाजिक संस्थाओं के प्रतिनिधि मौजूद रहे और डॉ. जैन के सम्मान में खड़े होकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

स्व. डॉ. बी.के. जैन ने अपने जीवन के पांच दशकों से अधिक समय को नेत्र चिकित्सा और समाज सेवा के लिए समर्पित किया। चित्रकूट स्थित सदगुरु नेत्र चिकित्सालय, जानकीकुंड को देश के अग्रणी नेत्र सेवा संस्थानों में स्थापित करने में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही। उनका उद्देश्य केवल इलाज करना नहीं, बल्कि गरीब, ग्रामीण और जरूरतमंद लोगों तक गुणवत्तापूर्ण नेत्र चिकित्सा पहुंचाकर उनके जीवन में रोशनी लौटाना था। यही कारण है कि लाखों मरीज आज भी उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं।

यह सम्मान उनके पुत्र एवं सदगुरु नेत्र चिकित्सालय के ट्रस्टी-निदेशक डॉ. इलेश जैन ने ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता कभी पुरस्कारों के पीछे नहीं भागे। उनके लिए किसी मरीज की आंखों की रोशनी लौटना और उसके चेहरे की मुस्कान ही सबसे बड़ा सम्मान था। उन्होंने यह उपलब्धि सदगुरु परिवार, विंध्य क्षेत्र की जनता और उन सभी मरीजों को समर्पित की, जिनके विश्वास ने इस सेवा यात्रा को आगे बढ़ाया।

समारोह में एक और महत्वपूर्ण घोषणा की गई। अब हर वर्ष पद्मश्री डॉ. बी.के. जैन मेमोरियल अवॉर्ड फॉर एक्सीलेंस इन कम्युनिटी आई केयर प्रदान किया जाएगा। यह सम्मान उन व्यक्तियों और संस्थाओं को मिलेगा जो ग्रामीण, गरीब और वंचित वर्ग तक उत्कृष्ट नेत्र सेवाएं पहुंचाने में उल्लेखनीय योगदान देंगे। यह घोषणा स्वयं डॉ. जैन की सेवा भावना और उनके आदर्शों को स्थायी पहचान देने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।

डॉ. बी.के. जैन का जीवन इस बात का उदाहरण है कि चिकित्सा केवल पेशा नहीं, बल्कि मानव सेवा का सबसे श्रेष्ठ माध्यम है। उनके द्वारा शुरू की गई सेवा की यह अलख आज भी डॉ. इलेश जैन और सदगुरु परिवार उसी समर्पण के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। मरणोपरांत मिला यह राष्ट्रीय सम्मान न केवल डॉ. बी.के. जैन की उपलब्धियों का गौरव है, बल्कि पूरे विंध्य क्षेत्र और चित्रकूट के लिए भी गर्व का विषय है। उनकी सेवा, सादगी और समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए सदैव प्रेरणा का स्रोत बने रहेंगे।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

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