Edition

सतना RTO में मार्किंग सिस्टम पर गहराए गंभीर सवाल! 10 हजार लेकर 5 हजार पहुंचाने के दावे से मचा हड़कंप……

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

 

सतना RTO कार्यालय में घूसखोरी का खेल? ‘मार्किंग सिस्टम’ पर गंभीर सवाल! जनता के बाद अब एजेंट भी परेशान…….

बाहरी व्यक्तियों की कथित भूमिका, एवं कार्यालय के बजाय RTO द्वारा निवास पर फाइलों के निस्तारण के आरोप; निष्पक्ष जांच की उठी मांग………

सतना। सतना क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) एक बार फिर कथित घूसखोरी, बाहरी व्यक्तियों की भूमिका और फाइलों के निस्तारण की प्रक्रिया को लेकर चर्चा में है। विभागीय सूत्रों और कुछ एजेंटों का दावा है कि कार्यालय में कई वर्षों से एक कथित मार्किंग सिस्टम संचालित है, जिसमें कुछ फाइलें पहले बाहरी व्यक्तियों के पास जाती हैं, पैसे लिए जाते हैं, और उसके बाद ही विभागीय प्रक्रिया आगे बढ़ती है, 

वहीं जब इस संबंध में जिला परिवहन अधिकारी (RTO) से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन पर कहा, मैं बाहर हूं, आप फोटो/वीडियो भेज दीजिए, मैं दिखवाता हूं। उनसे यह भी पूछा गया कि कार्यालय में बाहरी व्यक्तियों की मौजूदगी और फाइलों पर कथित रूप से उनके हस्ताक्षर किए जाने जैसी शिकायतें सामने लगातार आ रही हैं। इस पर भी उन्होंने विस्तृत टिप्पणी करने के बजाय मामले को दिखवाने की बात कही।

विभागीय सूत्रों का यह भी दावा है कि RTO अधिकारी शासकीय अवकाश के अलावा सप्ताह में 1 या 2 दिन के लिए ही कार्यालय में बैठते हैं, तथा अन्य दिनों फाइलों पर हस्ताक्षर और अन्य कार्य उनके निवास पर किए जाते है। यदि ऐसा है, तो इसकी भी प्रशासनिक जांच आवश्यक है।

सूत्रों के बताये अनुसार वाहन ट्रांसफर और परमिट से जुड़े मामलों, विशेषकर दूसरे जिलों अथवा अन्य राज्यों से आने वाले वाहनों में कथित रूप से अधिक राशि की मांग की जाती है। जिले के बाहर के वाहनों पर दो गुना एवं दूसरे राज्य के वाहनों पर चार गुना अवैधूली की जाती है।  

एक हालिया मामले में भी विभागीय सूत्रों ने ट्रांसफर प्रक्रिया में कथित अवैध लेन-देन का दावा भी किया है। बीते दिन कथित मार्किंग एजेंट द्वारा ट्रक ट्रांसफर करने का 10 हजार रु लिया गया, वहीं अधिकारी तक 5 हजार ही पहुंचाया गया। जिसकी जानकारी मिलते ही अधिकारी द्वारा प्राइवेट मार्किंग एजेंटो की मीटिंग बुलाई गईं और नाराजगी जाहिर की गईं, कहा गया की अब मार्किंग बंद की जाएगी… अब सोमवार से पैसों का लेनदेन बाहन क्षेत्र बाबू द्वारा ही किया जाएगा, हालाकी यह दावा केवल सूत्रों पर आधारित है और आधिकारिक रूप से पुष्ट नहीं है,

लोगों ने कहा कुल मिलाकर घूंसखोरी बंद नहीं होंगी बस सिस्टम चेंज किया जायेगा….

स्थानीय लोगों और एजेंटों का यह भी कहना है कि यदि यह शिकायतें गलत हैं तो परिवहन विभाग को सार्वजनिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, व बताना चाहिए की कम्प्यूटर से निकाले गए ट्रांसफर पेपर 30 न. के ऊपर की जा रही RTO एवं बाबू के अलावा वह तीसरी मार्किंग किसकी है, जिनपर आरोप लग रहे हैं। 

वहीं यदि इनमें तथ्य हैं तो कार्यालय की फाइलों, कंप्यूटर रिकॉर्ड और उन पर किए गए हस्ताक्षरों की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

लोगों का कहना है कि यदि सरकारी फाइलों पर किसी बाहरी व्यक्ति के हस्ताक्षर पाए जाते हैं, तो यह गंभीर प्रशासनिक जांच का विषय हो सकता है।

अब निगाहें जिला प्रशासन और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों पर हैं कि वे इन शिकायतों को कितनी गंभीरता से लेते हैं। निष्पक्ष जांच से ही यह स्पष्ट होगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो उसके लिए जिम्मेदार लोगों पर क्या कार्रवाई होती है।

Amit Mishra
Author: Amit Mishra

Group Editor, Rewanchal Roshni News Group

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!