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Children from the snake charmer community played ‘Snakes and Ladders’ based on child rights

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रायपुर 

राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा की अध्यक्षता में तिल्दा-नेवरा के सिनोधा स्थित सपेरा बस्ती में बाल चौपाल का आयोजन किया गया। बाल चौपाल के दौरान यह तथ्य सामने आया कि घुमंतू जीवनशैली एवं मुख्यधारा से अलग निवास करने के कारण सपेरा बस्ती के अनेक बच्चे शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं कर पा रहे हैं। अधिकांश बच्चों का जन्म अस्पताल में न होने के कारण उनका जन्म प्रमाण पत्र, नियमित टीकाकरण, आधार कार्ड सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज नहीं बन पाए हैं। इसके परिणामस्वरूप बच्चे शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी मूलभूत अधिकारों से वंचित हो रहे हैं। आयोग अध्यक्ष डॉ. वर्णिका शर्मा ने स्थानीय नागरिकों से शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए प्रशासन का सहयोग करने की अपील की। उन्होंने कहा कि आवश्यक दस्तावेज तैयार होने पर बच्चों के साथ-साथ पूरे परिवार को भी शासन की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल सकेगा। स्थानीय नागरिकों ने भी इस पहल का समर्थन करते हुए प्रशासन के साथ सहयोग का भरोसा दिलाया।

कार्यक्रम में सिनोधा के शासकीय मिडिल स्कूल के विद्यार्थियों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने विद्यालय में कंप्यूटर शिक्षा की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग रखी तथा बाल श्रम, बाल विवाह और गुड टच-बैड टच जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर खुलकर अपनी बात रखी। यह भी ज्ञात हुआ कि सपेरा समुदाय के कुछ परिवारों में बाल विवाह की परंपरा अब भी प्रचलित है। इस पर संज्ञान लेते हुए आयोग अध्यक्ष ने उपस्थित संबंधित अधिकारियों को बाल विवाह की रोकथाम, आवश्यक जांच तथा विधिसम्मत कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम में बच्चों ने रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं। बजरंगी मरावी ने हिप-हॉप नृत्य, जानवी यादव ने जस गीत और चार वर्षीय सुनीता ने कहानी सुनाकर सभी का मन मोह लिया। इस बाल चौपाल का मुख्य आकर्षण बाल अधिकारों की जागरूकता पर आधारित  सांप-सीढ़ी गतिविधि रही। सपेरा बस्ती में उनकी जीवनप्रणाली से जोड़कर  सांप सीढ़ी का खेल बनाकर खिलाया गया । इस खेल के माध्यम से बच्चों को सरल एवं रोचक तरीके से उनके अधिकारों, अच्छी आदतों, शिक्षा के महत्व तथा बाल संरक्षण से जुड़े संदेश दिए गए। बच्चों को समझाया गया कि जिस प्रकार खेल में अच्छी चाल आगे बढ़ाती है और बुरी चाल पीछे ले जाती है, उसी प्रकार वास्तविक जीवन में भी अच्छे संस्कार, शिक्षा और सही निर्णय उन्हें सफलता की ओर ले जाते हैं, जबकि बुरी आदतें उनके भविष्य को प्रभावित करती हैं। डॉ वर्णिका शर्मा ने कहा है कि बाल चौपाल 2.0 का आयोजन निरंतर जारी रहेगा और इसके माध्यम से बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता लाने और जमीनी समस्याओं को जानने की यात्रा आगे बढ़ती रहेगी।

Aditya
Author: Aditya

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