सतना। सतना पुलिस एक बार फिर गंभीर सवालों के घेरे में है। बरौधा थाना क्षेत्र से पुलिस की कथित बर्बरता का मामला सामने आया है। आरोप है कि थाने में पदस्थ एएसआई राकेश केवट ने दो युवकों की बेरहमी से पिटाई कर दी, जिससे दोनों के हाथ टूट गए। इससे भी बड़ा आरोप यह है कि शिकायत लेकर पहुंचे पीड़ितों की न एफआईआर लिखी गई, न एमएलसी कराई गई और न ही समय पर इलाज की व्यवस्था हुई।
अगर आरोप बेबुनियाद हैं तो फरियादी लगातार पुलिस अधिकारियों के चक्कर क्यों लगा रहे हैं? और यदि आरोप सही हैं तो क्या पुलिस का काम कानून की रक्षा करना है या खुद कानून हाथ में लेना?
सवाल थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली पर भी खड़े हो रहे हैं कि आखिर पीड़ितों की शिकायत दर्ज कर उन्हें संतुष्ट क्यों नहीं किया गया।
जब रीवा ज़ोन के आईजी लगातार अपराध और नशे पर नियंत्रण के लिए अभियान चला रहे हैं, तब ऐसी घटनाएं पुलिस की छवि पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं!
बाइट:- ज्ञान मिश्रा, पीड़ित……..
बरौधा थाना क्षेत्र के जमुना डाड़ निवासी ज्ञान मिश्रा और अनूप वर्मा का आरोप है कि वे सब्जी खरीदकर लौट रहे थे, तभी एएसआई राकेश केवट ने डंडों से उनकी पिटाई कर दी, जिससे दोनों के बाएं हाथ में फ्रैक्चर हो गया।
बाइट :- अनूप वर्मा, पीड़ित…..
पीड़ितों का कहना है कि निजी अस्पताल के एक्स-रे में फ्रैक्चर की पुष्टि हुई, लेकिन इसके बावजूद उनकी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। वे बरौधा थाना, चित्रकूट एसडीओपी कार्यालय और फिर एसपी कार्यालय तक न्याय की गुहार लगाते रहे। सवाल यह है कि क्या कोई व्यक्ति बिना वजह पुलिस पर इतने गंभीर आरोप लगाएगा?
आखिर ऐसी क्या स्थिति बनी कि पुलिस पर ही बर्बरता के आरोप लग रहे हैं? क्या वरिष्ठ अधिकारी इस मामले में निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर कार्रवाई करेंगे, या फिर यह मामला भी फाइलों में दब जाएगा?
फिलहाल अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रेमलाल कुर्वे ने जांच के बाद उचित कार्रवाई का भरोसा दिया है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि जांच के बाद सच सामने आता है या पीड़ितों को फिर सिर्फ आश्वासन ही मिलता है।









