भोपाल। मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी सोमवार को राज्य स्तरीय जाति प्रमाणपत्र छानबीन समिति के समक्ष पेश हुईं। उन्होंने समिति को अपनी वंशावली (फैमिली ट्री) सहित करीब 110 साल पुराने दस्तावेज सौंपते हुए कहा कि वह बागरी समाज से हैं, जो मध्य प्रदेश में अनुसूचित जाति (एससी) वर्ग में शामिल है। मंत्री ने कहा कि उनके खिलाफ राजनीतिक कारणों से अभियान चलाया जा रहा है।

सुनवाई के बाद पत्रकारों से चर्चा में प्रतिमा बागरी ने कहा, मेरे पास 110 साल पुराने रिकॉर्ड हैं, जिनमें हमारे समाज को बागरी ही दर्ज किया गया है। कहीं भी हमें राजपूत या ठाकुर नहीं लिखा गया। मेरे परिवार से पहले भी कई विधायक रहे हैं। ऐसे में सिर्फ मेरे जाति प्रमाणपत्र पर सवाल उठाना दुर्भावनापूर्ण है।
गांव में मुनादी कराए जाने पर मंत्री ने नाराजगी जताते हुए कहा, मुनादी तो अपराधियों के लिए होती है। मैंने कोई अपराध नहीं किया है। इस तरह का व्यवहार बेहद दुखद है। यदि दस्तावेज चाहिए थे तो सीधे मांगे जा सकते थे। मैं इस मामले को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सामने भी उठाऊंगी और संबंधित अधिकारियों से जवाब मांगूंगी।
वहीं, शिकायतकर्ता एवं कांग्रेस अनुसूचित जाति विभाग के अध्यक्ष प्रदीप अहिरवार ने समिति के सामने अपने दस्तावेज पेश करते हुए दावा किया कि 1950 के रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर बागरी जाति को अनुसूचित जाति मानने पर सवाल हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।
राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने दोनों पक्षों से 150 से अधिक पन्नों के दस्तावेज प्राप्त किए हैं। अधिकारियों के अनुसार, सभी दस्तावेजों का परीक्षण और कानूनी समीक्षा पूरी होने के बाद ही समिति अपना अंतिम निर्णय देगी। फिलहाल मामले में सुनवाई पूरी हो चुकी है और फैसला जांच रिपोर्ट के आधार पर लिया जाएगा।









