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भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से आसान होंगे भूमि रिकॉर्ड, राजस्व सेवाओं में आएगी पारदर्शिता

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भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व सेवाएँ होंगी अधिक प्रभावी, भूमि रिकॉर्ड प्राप्त करना होगा आसान

डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम का जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग में प्रथम चरण पूर्ण
भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई से शुरू होगा अगला चरण

भोपाल

प्रदेश के नागरिकों को भूमि संबंधी सरकारी अभिलेखों की सहज, त्वरित और पारदर्शी उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ पुराने भू-अभिलेखों के सुरक्षित संरक्षण के लिए राज्य सरकार प्रतिबद्ध है। इसी उद्देश्य से डिजिटल इंडिया भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम के तहत प्रदेश में चरणबद्ध रूप से डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के माध्यम से राज्य के लगभग 15 करोड़ पुराने भू-अभिलेख रिकॉर्ड का आधुनिकीकरण किया जाएगा, जिसके लिए दस्तावेज प्रबंधन प्रणाली और डीबीईएस सॉफ्टवेयर विकसित किए जा रहे हैं।

वर्ष 2008 में शुरू हुए राष्ट्रीय भूमि अभिलेख आधुनिकीकरण कार्यक्रम को 1 अप्रैल 2016 से डीआईएलआरएमपी के रूप में पुनर्गठित किया गया था। इसके तहत मॉडर्न रिकॉर्ड रूम (एमआरआर) के अंतर्गत पुराने अभिलेखों के डिजिटाइजेशन की रूपरेखा तैयार की गई। योजना के फेज-1 (2013-2020) में लगभग 3,18,82,222 दस्तावेजों और फेज-2 (2021-22) में लगभग 2,39,24,462 दस्तावेजों की स्कैनिंग का कार्य पूर्ण किया जा चुका है। अब फेज-3 के तहत 15 करोड़ रिकॉर्ड्स के डिजिटाइजेशन का कार्य किया जा रहा है।

परियोजना में जिला स्तर पर अत्याधुनिक स्कैनिंग केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं। दस्तावेजों की सुरक्षित स्कैनिंग, मेटा-डाटा एंट्री और भोपाल में डीबीईएस आधारित डबल-बाइंड डेटा एंट्री की व्यवस्था की गई है। आंकड़ों की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए संबंधित क्षेत्र के पटवारी द्वारा ऑनलाइन गुणवत्ता परीक्षण किया जाएगा। अंतिम रूप से सत्यापित रिकॉर्ड ‘भूलेख पोर्टल’ पर ऑनलाइन उपलब्ध कराए जाएंगे।

योजना के प्रथम चरण में जबलपुर एवं नर्मदापुरम संभाग के 12 जिलों में लगभग 2.70 करोड़ दस्तावेजों की शत-प्रतिशत स्कैनिंग पूरी कर ली गई है। इन जिलों में डेटा एंट्री का कार्य निरंतर जारी है। दूसरे चरण में भोपाल एवं सागर संभाग के 11 जिलों में जुलाई 2026 से कार्य प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए संबंधित जिलों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

भू-अभिलेखों के डिजिटाइजेशन से राजस्व व्यवस्था अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनेगी। साथ ही नागरिकों को अपने भूमि रिकॉर्ड ऑनलाइन देखने और प्राप्त करने में आसानी होगी। इससे भूमि अभिलेखों का सुरक्षित संरक्षण सुनिश्चित होने के साथ राजस्व सेवाओं की गुणवत्ता और दक्षता में भी वृद्धि होगी।

 

Aditya
Author: Aditya

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