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पिता ने कर्ज लेकर दिलाया धनुष, बेटी कीर्ति शर्मा ने गोल्ड जीतकर बढ़ाया जींद का मान

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जींद.

हरियाणा के जींद जिले का छोटा सा गांव रिटोली उस समय ख़ुशी से सराबोर हो उठा, जब एशियन गेम्स 2026 से तीरंदाजी में देश के लिए गोल्ड मेडल जीतने की खबर आई. गांव की बेटी कीर्ति शर्मा ने महिला रिकर्व टीम इवेंट में अपनी साथियों अंकिता भकत और कुमकुम अनिल मोहोद के साथ मिलकर फाइनल में दक्षिण कोरिया को पराजित कर यह स्वर्णिम इतिहास रचा है.

जैसे ही कीर्ति के स्वर्ण पदक जीतने की सूचना गांव पहुंची, उनके घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया. बता दें, भारतीय महिला रिकर्व तीरंदाजी टीम ने शुक्रवार को दबाव के बीच शानदार प्रदर्शन करते हुए 10 बार की ओलंपिक चैंपियन दक्षिण कोरिया को 5-3 से हराकर एशियाई खेलों में अपना पहला स्वर्ण पदक जीता. अनुभवी अंकिता भकत, कीर्ति शर्मा और 17 वर्षीय कुमकुम मोहोड़ ने तेज हवा के कारण चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बीच धैर्य बनाए रखते हुए मौजूदा चैंपियन दक्षिण कोरिया को पछाड़कर ऐतिहासिक जीत दर्ज की. प्रदेश के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी सोशल मीडिया के जरिए बधाई देते हुए कहा कि हमारी बेटियां लगातार स्वर्णिम प्रदर्शन कर देश का मान बढ़ा रही हैं. कीर्ति की इस ऐतिहासिक सफलता के पीछे उनके परिवार का वर्षों का संघर्ष और त्याग छिपा है.

माता गुड्डी देवी ने नम आंखों से यादों के पन्ने पलटते हुए बताया कि कीर्ति की प्रतिभा की पहचान पिल्लूखेड़ा मंडी के एफएस स्कूल में हुई थी. शुरुआत में वह एथलेटिक्स में दौड़ लगाया करती थी. कोच ऊधम सिंह ने जब उनके स्टैमिना और एकाग्रता को देखा, तो उसे तीरंदाजी में किस्मत आजमाने की सलाह दी. बेटी के गोल्ड जीतने  के बाद उनकी मां गुड्डी देवी बताती हैं,"हमारे पास तो इतने पैसे भी नहीं थे. हमने सोचा छोटा-मोटा खेल होगा. पहली बार ₹5,000 का लकड़ी का धनुष उधार पैसे लेकर खरीदकर दिया था. जब उसकी कला में निखार आया तो कोच के कहने पर ₹55,000 का प्रोफेशनल धनुष आढ़ती से कर्ज लेकर लाए."

कीर्ति के पिता विजय कुमार, जो महज तीन एकड़ जमीन पर खेती करके परिवार का गुजर-बसर करते हैं, बताते हैं कि जब बच्ची का चयन भारतीय खेल प्राधिकरण के पद्मा हजारीबाग (झारखंड) केंद्र में हुआ, तब उसके अभ्यास के लिए ₹55,000 का नया धनुष भी आढ़ती से ब्याज पर पैसे उठाकर दिलाना पड़ा. पिता ने भावुक होते हुए कहा,"जब बेटी का फोन आया कि 'पापा, हमने कोरिया को हराकर गोल्ड जीत लिया है', तो एक पल के लिए यकीन ही नहीं हुआ. उस वक्त मैं खेत में धान की कटाई की तैयारी कर रहा था. 3 एकड़ जमीन में बच्चों को पढ़ाया और इस मुकाम तक पहुंचाया.

आज बेटी ने सारा कर्ज चुकता कर दिया."  कीर्ति बीते 4 सालों से परिवार और घर त्यागकर झारखंड में इंटरनेशनल कोच ऊधम सिंह के मार्गदर्शन में दिन-रात कड़ा अभ्यास कर रही थी. घर पर पोती की जीत की सूचना सबसे पहले उनके भाई ने हरिद्वार से दी, जो वहां रहकर जेईई की पढ़ाई कर रहे हैं. दादा रामजवारी और दादी लखपति देवी ने खुशी जताते हुए कहा,"बेटी ने पूरे देश और हरियाणा का नाम पूरे विश्व में ऊंचा कर दिया है. हमारी पोती ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे बुलंद हों तो गांव की गलियों से निकलकर भी दुनिया जीती जा सकती है." गौरतलब है कि एशियन गेम्स 2026 में जींद जिले के खिलाड़ियों का दबदबा कायम है. कीर्ति शर्मा से पहले निशानेबाज नीरू ढांढा दो स्वर्ण पदक, जुलाना की पूजा कबड्डी में स्वर्ण पदक और अलेवा के हिमांशु रजत पदक जीतकर देश का नाम रोशन कर चुके हैं.

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Author: Aditya

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