Edition

महंगे चावल से मिलेगी राहत! 50 लाख टन चावल बाजार में उतारने की तैयारी, कारोबारियों पर कड़ी नजर

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें

नई दिल्ली

 चावल की बढ़ती कीमतों ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। कमजोर मानसून, धान का रकबा घटना और वैश्विक बाजार में भारतीय चावल की बढ़ती मांग ने एक वर्ष में देश में चावल की औसत खुदरा कीमत लगभग 13 प्रतिशत बढ़ी है।

नियंत्रण के लिए सरकार ने दोतरफा रणनीति अपनाई है। बफर स्टाक से खुले बाजार में चावल की बिक्री दोगुना कर 50 लाख टन कर दिया गया है। साथ ही कारोबारियों स्टाक पर निगरानी सख्त करते हुए प्रत्येक शुक्रवार स्टाक का ब्योरा देना अनिवार्य कर दिया गया है।

कीमतों पर नियंत्रण के लिए सरकार ने खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत चालू वर्ष में चावल बेचने का लक्ष्य 25 लाख टन से बढ़ाकर 50 लाख टन कर दिया है। इसके तहत 31 अक्टूबर तक ई-नीलामी के जरिए निजी कारोबारियों को 25 लाख टन चावल बेचा जा चुका है। पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह बिक्री केवल 11 लाख टन थी।

चावल और धान का स्टाक रखने वाले सभी कारोबारियों के लिए साप्ताहिक जानकारी देना तत्काल रूप से अनिवार्य कर दिया है। थोक और खुदरा कारोबारियों, बड़ी रिटेल चेन तथ चावल मिलों को हर शुक्रवार खाद्य स्टाक पोर्टल पर स्टाक का ब्योरा देना होगा।

इसमें बासमती, प्रीमियम गैर-बासमती, सामान्य गैर-बासमती, उसना चावल, टूटे चावल और धान की अलग-अलग जानकारी देनी होगी। गलत जानकारी देने और पंजीकरण नहीं कराने या निर्धारित स्टाक सीमा का उल्लंघन करने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत कार्रवाई होगी।

चावल की कीमतों में इस तेजी के पीछे इस साल मानसूनी बारिश की कमी और धान का घटता रकबा बड़ी वजह है। खरीफ सीजन में धान की बुवाई का क्षेत्र पिछले साल के मुकाबले 3.7 प्रतिशत कम हो गया है। इससे कारोबारियों को पैदावार कम रहने की आशंका है, जिसका असर अभी से बाजार भाव पर दिखने लगा है।

इसी दौरान पश्चिम एशिया में तनाव के चलते कई देश चावल खरीदकर अपना स्टाक समृद्ध करने में जुटे हैं। इससे भारतीय चावल का निर्यात भी बढ़ा है। बासमती और गैर-बासमती दोनों किस्मों में तेजी दर्ज की गई है। कुछ खास किस्मों के चावल के दाम एक साल में 20-25 प्रतिशत तक बढ़े हैं।

चावल की खपत और कीमतों के दबाव को देखते हुए 31 जनवरी 2027 तक आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और तेलंगाना को चावल एवं धान पर जरूरत के मुताबिक स्टाक सीमा लगाने की छूट रहेगी।

नाफेड, एनसीसीएफ और केंद्रीय भंडार को भारत चावल की अतिरिक्त मात्रा दी जाएगी, ताकि दक्षिण भारत में सस्ते चावल की उपलब्धता बढ़ाई जा सके।

 

Aditya
Author: Aditya

Share करें

✓ Link copy हो गया!

Leave a Comment

और पढ़ें

error: Content is protected !!