सतना। सतना शहर में अवैध निर्माणों का मुद्दा अब केवल नियमों के उल्लंघन तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह शहर की यातायात व्यवस्था, सुरक्षा और भविष्य की शहरी योजना के लिए गंभीर चुनौती बनता जा रहा है।
नगर निगम क्षेत्र के मुख्य बाजार, रीवा रोड, पन्ना रोड, सतना-कोठी मार्ग सहित कई प्रमुख मार्गों पर रहवासी भूखंडों को व्यावसायिक गतिविधियों में तब्दील कर बहुमंजिला इमारतें खड़ी कर दी गई हैं। इनमें से कई भवनों में न पर्याप्त पार्किंग की व्यवस्था है और न ही टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के निर्धारित मानकों का पालन दिखाई देता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इन निर्माणों को लेकर लगातार शिकायतें की जाती हैं, लेकिन समाधान की बजाय मैनेजमेंट का खेल ज्यादा दिखाई देता है। लोगों का कहना है कि निर्माण कार्य शुरू होते ही नगर निगम की निर्माण शाखा के जिम्मेदार अधिकारी मौके पर पहुंचते हैं, दिखावे के नोटिस जारी होते हैं, कार्रवाई का माहौल बनता है, लेकिन कुछ समय बाद मामला शांत हो जाता है और निर्माण कार्य फिर उसी गति से जारी रहता है।
शहरवासियों के अनुसार आज सतना के प्रमुख मार्गों पर सड़क से सटी हुई कई बहुमंजिला इमारतें खड़ी हैं, जिनमें पार्किंग के लिए पर्याप्त स्थान तक नहीं छोड़ा गया। इनमें से कई भवनों को बैंक, वित्तीय संस्थानों, कार्यालयों और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को किराए पर देने की तैयारियां चल रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि ऐसे भवनों में बैंक या बड़े व्यावसायिक संस्थान शुरू हो गए, तो प्रतिदिन सैकड़ों वाहन सड़क पर खड़े होंगे, जिससे मुख्य मार्गों पर जाम की स्थिति बनना तय है।
लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब पार्किंग, सेटबैक और यातायात प्रबंधन जैसी शर्तें भवन स्वीकृति का अनिवार्य हिस्सा हैं, तो फिर बिना इन व्यवस्थाओं के इमारतें कैसे खड़ी हो गईं? यदि भविष्य में जाम, दुर्घटना या किसी आपातकालीन स्थिति में जनहानि होती है तो उसकी जिम्मेदारी किसकी होगी, भवन मालिक की, निर्माण शाखा की या फिर उन अधिकारियों की जिन्होंने समय रहते कार्रवाई नहीं की? लोगों का यह भी कहना है कि अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के साथ-साथ उन अधिकारियों और कर्मचारियों की भी जवाबदेही तय होनी चाहिए जिनकी निगरानी कार्यकाल के दौरान ये भवन तैयार हुए।
जी प्लस थ्री नियम सिर्फ कागजों तक सीमित।नगर निगम और टाउन एंड कंट्री प्लानिंग के नियमों के अनुसार किसी भी जी प्लस थ्री यानी ग्राउंड फ्लोर के ऊपर तीन मंजिल तक निर्माण के लिए विधिवत अनुमति लेना अनिवार्य होता है। इसके साथ फायर सेफ्टी, पार्किंग, सेटबैक, भूकंपरोधी निर्माण और आपातकालीन निकासी जैसी व्यवस्थाओं का पालन भी जरूरी होता है। लेकिन सतना में कई बहुमंजिला इमारतें ऐसी हैं जिनमें न पर्याप्त पार्किंग दिखाई देती है और न ही सुरक्षा मानकों का पालन। कई जगह तो रिहायशी क्षेत्रों को ही व्यावसायिक गतिविधियों में बदल दिया गया है। सवाल यह है कि जब नियम स्पष्ट हैं, तो फिर निर्माण के शुरुआती चरण में ही इन्हें रोका क्यों नहीं जाता?
कॉलोनी सेल की भूमिका पर गंभीर सवाल!अवैध निर्माणों को रोकने की जिम्मेदारी नगर निगम के कॉलोनी सेल पर होती है, लेकिन स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि यह विभाग केवल खानापूर्ति तक सीमित होकर रह गया है। लोगों का कहना है कि निर्माण शुरू होते ही अधिकारियों को जानकारी मिल जाती है, फिर भी समय रहते कार्रवाई नहीं होती! आरोप तो यह भी लग रहे हैं कि कई मामलों में पहले दिखावे के नोटिस जारी किए जाते हैं और फिर फाइलें ठंडे बस्ते में डाल दी जाती हैं। यही कारण है कि शहर में अवैध निर्माण करने वालों के हौसले लगातार बुलंद होते जा रहे हैं।
आम लोगों का कहना है कि यदि किसी गरीब व्यक्ति द्वारा छोटा निर्माण किया जाए तो तत्काल कार्रवाई हो जाती है, लेकिन रसूखदारों की बहुमंजिला इमारतों पर प्रशासनिक सख्ती दिखाई नहीं देती।
शहर में बढ़ते अव्यवस्थित निर्माणों को देखकर अब आम नागरिक पूछ रहे हैं कि आखिर नगर निगम की निर्माण शाखा और अतिक्रमण दस्ता शहर को व्यवस्थित बनाने के लिए हैं या फिर केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित रह गए हैं !…….









