हत्या के आरोपी की रिहाई या विजय जुलूस? जेल से निकलते ही फूल-मालाओं से स्वागत, बोलेरो के बोनट पर बैठकर सिगरेट पी और निकाली रैली; आखिर प्रशासन का खौफ कहां?….
सतना। सतना में कानून का खौफ कितना है और अपराधियों के हौसले कितने बुलंद हैं, इसकी चर्चा आज वायरल हो रहे एक वीडियो को लेकर हो रही है। 16 वर्षीय सत्यम शुक्ला हत्याकांड में जेल में बंद मान सिंह उर्फ बेटू सिंगरौल को करीब 14 महीने बाद जमानत क्या मिली, जेल के बाहर स्वागत का ऐसा नजारा देखने को मिला, मानो कोई बड़ा चुनाव जीतकर लौटा हो। फूल-मालाएं पहनाई गईं, समर्थकों की भीड़ जुटी और गाड़ियों के काफिले के साथ रैली निकाल दी गई।
हैरानी तो तब हुई जब आरोपी बोलेरो के बोनट पर बैठकर सिगरेट पीता नजर आया। पीछे बाइक सवारों का काफिला चलता रहा। बिड़ला रोड होते हुए यह रैली सिद्धार्थ कॉलोनी तक पहुंची। अब इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
आखिर यह कैसी रिहाई का जश्न?… जिस मामले में 16 साल के मासूम सत्यम शुक्ला की जान चली गई, उस मामले के आरोपी को जमानत मिलने के बाद इस तरह फूल-मालाओं से स्वागत और सड़क पर शक्ति प्रदर्शन आखिर क्या संदेश दे रहा है? जमानत मिलना अदालत का कानूनी फैसला है, लेकिन क्या इसका मतलब यह है कि जेल से बाहर आते ही इस तरह जश्न मनाया जाए, मानो कोई बड़ी जंग जीतकर आया हो?
सड़क पर गाड़ियों का काफिला, बाइक रैली और बोलेरो के बोनट पर बैठकर सिगरेट पीने का अंदाज। यह सब देखकर सवाल उठना लाजिमी है कि आखिर ऐसे शक्ति प्रदर्शन करने वालों को कानून और प्रशासन का कितना डर है? क्या सार्वजनिक सड़कें इस तरह के प्रदर्शन के लिए हैं? क्या जिम्मेदार अधिकारियों को यह सब दिखाई नहीं दे रहा?
क्या था सत्यम शुक्ला हत्याकांड?…. घटना 4 सितंबर 2025 की है। कोलगवां थाना क्षेत्र के एफसीआई गोदाम के पास सूर्यप्रताप सिंह एक दुकान पर चाय पीने रुका था। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान मान सिंह उर्फ बेटू सिंगरौल अपने साथियों के साथ वहां पहुंचा। विवाद के दौरान गोली चली। बीच-बचाव करने पहुंचे 16 वर्षीय सत्यम शुक्ला के सीने में गोली लग गई। उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन रीवा ले जाते समय उसकी मौत हो गई। इस मामले में मान सिंह समेत चार आरोपियों को जेल भेजा गया था।
अब प्रशासन की परीक्षा है!…. वीडियो वायरल होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिला प्रशासन और पुलिस इस मामले में क्या कदम उठाते हैं? क्या सार्वजनिक सड़क पर इस तरह शक्ति प्रदर्शन करने, वाहन के बोनट पर बैठने और यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों पर कार्रवाई होगी? या फिर कुछ दिनों तक चर्चाएं चलेंगी और मामला धीरे-धीरे शांत हो जाएगा?
सतना में कानून का पालन करने वाले आम लोगों के मन में भी सवाल उठ रहे हैं। आखिर एक गंभीर हत्याकांड के आरोपी की जमानत पर रिहाई को इस तरह विजय उत्सव का रूप देने की जरूरत क्यों पड़ी? जमानत अदालत ने दी है, लेकिन कानून से ऊपर होने का अधिकार किसी को नहीं दिया है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस खुलेआम शक्ति प्रदर्शन पर अपनी सख्ती दिखाता है या फिर अपराधियों के हौसलों पर लगाम लगाने के दावे सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहेंगे।